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आखिर क्यों कोई जल्लाद मंगल पांडे को फांसी देने के लिए तैयार नहीं था?

आज तारीख है 29 मार्च 2022। इतिहास की बात करें तो देश के स्वतंत्रता संग्राम में 29 मार्च के दिन की खास अहमियत है।1857 कलकत्ता के निकट बैरकपुर में मंगल पांडे ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका। दरअसल 1857 में 29 मार्च को मंगल पांडे ने बैरकपुर में ईस्ट इंडिया कंपनी के अंग्रेज अफसर पर पहली बार गोली चला दी। अंग्रेज शासन के खिलाफ भारत में यह पहला विद्रोह था, जिसे सैनिक विद्रोह कहा गया।अंग्रेज हुक्मरान ने इस क्रांति को दबाने के लिए अपना सब कुछ दॉव पर लगा दिया।बंगाल की बैरकपुर छावनी में 34वीं बंगाल नेटिव इंफेन्टरी के मंगल पांडे ने परेड ग्राउंड में दो अंग्रेज अफसरों पर हमला किया और फिर खुद को गोली मारकर घायल कर लिया। उन्हें 7 अप्रैल, 1857 को अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी दे दी। स्थानीय जल्लादों ने मंगल पांडेय को फांसी देने से मना कर दिया, जिसकी वजह से कोलकाता से चार जल्लादों को बुलाकर देश के इस जांबाज सिपाही को फाँसी दी गई।

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