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सालों से अटका रामपुर-बटुरा प्रोजेक्ट, महाप्रबंधक ने सारी कमियों को दूर कर जल्द ही कार्य शुरू करने का दिया आश्वासन

एसईसीएल के सोहागपुर कोयलांचल एरिया का मेगा प्रोजेक्ट रामपुर-बटुरा को शुरू करने के लिए पर्यावरण मंत्रालय द्वारा हरी झंडी दे दी गई है। दस सालों से लंबित यह प्रोजेक्ट अपनी निर्धारित समय सीमा से काफी लेट हो चुका है।

खदानों के श्रमिकों द्वारा ऐसा पता चला है कि यह बटुरा प्रोजेक्ट साल 2017 तक खुल जाना था। अब तक इस प्रोजेक्ट के लिए करोड़ो रूपए की मुआवजा राशि का भुगतान हो चुका है और इससे सम्बंधित सारी फॉर्मेलिटी भी पूरी हो चुकी है। लेकिन अभी भी कुछ बचा है।

अगर कोयलांचल एरिया में यह मेगा रामपुर बटुरा प्रोजेक्ट खुलता है तो यहां पर अगले 30 सालों तक 30 मिलियन टन उत्पादन के लिए कोयले का विशाल भंडार है। साथ ही इस प्रोजेक्ट से एरिया के कई युवाओं को रोजगार का नया अवसर भी मिल सकता है। लेकिन पिछले दस सालों से इस प्रोजेक्ट में एरिया प्रबंधन के अधिकारियों द्वारा खास दिलचस्पी नहीं देखी गई जिस कारण अभी तक यह प्रोजेक्ट का काम बहुत ही धीमी गति से किया जा रहा है।

सोहागपुर एरिया पहले से ही लगातार घाटे में चल रहा है। यह प्रोजेक्ट कई मायनों से इसलिए भी खास है क्योंकि लगातार सुहागपुर एरिया में खदानें बंद हो रही हैं यही कारण है कि यह प्रोजेक्ट एक नई उम्मीद की किरण को जगाने का काम करेगी।

और इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से कई नई माइंस भी खुलेगी और एरिया का घाटा भी कम होगा, साथ ही रोजगार भी बढ़ेगा। पर नई माइंस खुलने में प्रशासनिक फॉर्मेलिटी को पूरा करने में ही कई सालों का वक्त लग जाने की आशंका जताई जा रही है, जिससे यह सपना पूरा होने में अभी काफी देरी है। इस संबंध में महाप्रबंधक शंकर नागाचारी बताया कि काश्तकारों के जमीन अधिग्रहण एवं मुआवजा वितरित करने की कार्रवाई तेजी से पूरी की जा रही है। और बहुत जल्द इन कमियों को दूर करते हुए शीघ्र प्रोजेक्ट शुरू किया जायगा।

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