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जिले में बढ़ता अवैध कबाड़ का कारोबार

लोहा, कोयला, ड्रग्स आदि की तस्करी को पीछे छोड़ कर जिले में अब एक नए तरह का अवैध कारोबार पैर पसार रहा है। कबाड़ और रद्दी सामान की तस्करी और माफिया गिरी तेजी से फैल रही है।

हाल ही में शहडोल जिले की बुढार पुलिस ने ऐसे ही अवैध कबाड़ के कारोबार में लगे कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कबाड़ से लदे दो ट्रकों के साथ 5 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। दोनों ट्रकों से लगभग 3.4 लाख रुपए का कबाड़ भी जप्त किया गया है।

कबाड़ की चोरी की सूचना पुलिस को 28 अगस्त को मिली थी। जिसको ध्यान में रखते हुए पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग 43 में मिश्रा क्रेशर बुढार के पास दोनों ट्रकों को रोक लिया। इनमें से पहले ट्रक का नंबर सीजी 10 सी 5052 और दूसरे ट्रक का नंबर डी एल 01 एल आर 3595 बताया गया है।

इनमें पहला आरोपी ड्राइवर बबलू हुसैन जबलपुर का रहने वाला है जबकि दूसरा आरोपी संदीप बर्मन कटनी जिले का निवासी बताया गया है।

मिली हुई जानकारी के माध्यम से जब पुलिस को शक हुआ तो दोनों ट्रकों की तलाशी ली गई। ट्रकों की जांच करने पर पहले ट्रक से लोहे का स्क्रैप , लोहे का रस्सा, एंगल, पाइप जैसे अनेक चीजें प्राप्त हुई। इनकी बाजार कीमत लगभग तीन लाख आंकी गई है। इसमें यदि 15 लाख रुपए की कीमत के ट्रक को मिला दिया जाए तो कुल 18 लाख रुपए की होता है।

जबकि पुलिस द्वारा की गई दूसरे ट्रक की तलाशी पर स्क्रैप, डीजल पंप, साईकिल,प्लास्टिक, गत्ता आदि चीजें बरामद हुई। जिनकी कीमत 40000 और ट्रक की कीमत 8 लाख बताई गई है।

आरोपियों से पूछताछ में पाया गया कि अमलाई के रहने वाले राजा खान और बद्री पांडे, सोहागपुर निवासी रहीम और जबलपुर के रहने वाले महमूद हसन के द्वारा यह अवैध कारोबार किया जा रहा था।

इसी तरह की एक दूसरी घटना सुहागपुर में भी सामने आई है। बीते शुक्रवार को मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने चोरी का माल ले जाते हुए एक ट्रक को धर दबोचा। पूछने पर ड्राइवर ने बताया कि सारा सामान अमलाई से लोड होकर शहडोल रोड कोनी तिराहा होते हुए जबलपुर भेजा जाना था। पुलिस को सूचना मिलते ही कुदरती मेडिकल चौराहे के पास ट्रक को पकड़ लिया गया।

ट्रक के ड्राइवर आरोपी आशीष दुबे को गिरफ्तार कर लिया गया। जिले में बढ़ती माफियागिरी और अवैध कारोबार देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन अपराधों की रोकथाम के लिए प्रशासन और पुलिस का क्या प्लान है इसके विषय में दोनों खामोश हैं। खबर का दूसरा पहलू ये भी है कि कबाड़ गरीब आदमी के लिए जीविका का भी साधन है जिसे वे रीसाइक्लिंग कंपनियों को बेचकर अपना पेट पालते हैं।

प्रशासनं के पास ऐसे गरीब लोगों और माफियाओ में अंतर पहचानने का क्या आधार है, इसका उत्तर भी प्रशासन के पास नहीं है।यही कारण है कि अपराधियों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। प्रशासन को इस पर सख्त निरीक्षण करना चाहिए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्यवाही भी की जानी चाहिए।

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