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बारह लाख का धान घोटाला

भारत एक कृषि प्रधान देश है। जहां की लगभग 70 फ़ीसदी आबादी किसानी पर निर्भर करती है। इसलिए किसानों को उनकी फसल के लिए वक्त पर भुगतान ना करना किसान परिवारों के लिए एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है।

यहां नए खरीफ की फसलों की बुवाई भी की जा चुकी है। जबकि अभी तक पिछले मानसून की धान की फसलों का भुगतान भी नहीं किया गया है। बल्कि 9 महीने बाद भी भुगतान प्रक्रिया में घोटाले की खबर सामने आ रही है।

घटना कटनी जिले के बहोरीबंद क्षेत्र के संसारपुर खरीदी केंद्र की है। यहां एक दर्जन से भी अधिक किसानों का भुगतान पिछले 9 महीनों से लटका हुआ है। किसान देश का अन्नदाता कहा जाता है और वह अपनी फसलों का भुगतान लेने के लिए महीनों से अधिकारियों के पास चक्कर काट रहा है लेकिन उन्हें बार-बार खाली हाथ ही लौटाया जा रहा है।

असल में बात यह है की अफसरों ने फसल की खरीदी का जिम्मा उस महिला स्वयं सहायता समूह को दिया था जिसकी इलाके में अच्छी राजनीतिक पकड़ है। खरीफ की फसलों की खरीदी का समय बीत गया है और जब अधिकारियों द्वारा खरीदी की जांच की गई तो पोर्टल में 625 क्विंटल धान की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। इतनी धान की बाजार कीमत लगभग 12 लाख रुपए पहुंचती है।

फसल भुगतान में जब इतने बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ तो संबंधित अधिकारियों के कान में जूं रेंगी। नागरिक आपूर्ति निगम ने संबंधित स्वयं सहायता समूह को आनन-फानन में पत्र लिखकर 12 लाख रुपए की धान जमा कराने का निर्देश दिया दिया था। इसके बावजूद भी संबंधित अधिकारी ढुलमुल रवैया अपनाते रहे और इस विषय में कोई कार्यवाही नहीं की गई।

इतने बड़े फसल घोटाले का नुकसान केवल और केवल उन अन्नदाता किसानों को भुगतना पड़ रहा है जो दिन रात खेतों में पसीना बहा कर फसल उगाते हैं। मेहनत से उगाई गई फसल को बेचने के बाद भी जब किसानों को उनका भुगतान नहीं मिला तो इसकी शिकायत किसान भाइयों ने कलेक्टर से की। लेकिन अभी तक इस विषय में केवल कार्यवाहिओं का आदेश-निर्देश ही दिया जा रहा है और किसान अभी भी अपने भुगतान के लिए इंतजार कर रहे हैं।

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