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फिर उठी विंध्य प्रदेश की मांग

भारत की आजादी के बाद, सन 1948 से 1956 तक विंध्य प्रदेश एक राज्य के रूप मेें सेंट्रल प्रोविंस का हिस्सा रहा लेकिन 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के बाद इसे मध्यप्रदेश में शामिल कर दिया गया। कई लोगों का मानना है की मध्यप्रदेश में शामिल होने के बाद विंध्य प्रदेश की उतनी तरक्की नहीं हो सकी जितनी होनी चाहिए थी।

यही कारण था की सन 2001 में मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ को अलग कर नया राज बनाया गया इसी तरह विंध्य प्रदेश के भी गठन को लेकर इलाके में फिर से मांग उठने लगी है।

क्षेत्र के पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी की अगुवाई में इसी मांग को लेकर जन अस्मिता यात्रा चलाई गई। एक कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान उन्होंने विंध्य प्रदेश के पुनर्गठन की बात की। उन्होंने कहा कि जनकल्याण और आम जनों की के विकास के लिए अलग विंध्य प्रदेश बनाने की आवश्यकता है।

साथ ही इलाके की ग्रामीण जनता को देखते हुए प्रत्येक तहसील में गोबर प्लांट लगाने की भी आवश्यकता है। पूर्व विधायक जी का मानना है कि जहां गोबर प्लांट से लोगों को रोजगार मिलेगा, ऊर्जा साधन मिलेंगे, वही गोवंश की रक्षा भी होगी।

जन अस्मिता यात्रा के संयोजक के तौर पर उन्होंने कहा कि विंध्य प्रदेश खनिज संपदा और प्राकृतिक सुंदरता से भरा पड़ा है। यहां विकास की और रोजगार की असीम संभावना है। लेकिन लंबे समय से इस क्षेत्र की अनदेखी के कारण यह लगातार पिछड़ता जा रहा है। यदि भविष्य में विंध्य प्रदेश बनता है तो यहां विकास की गाड़ी तेज गति से दौड़ने लगेगी और लोगों को हर तरह की सुविधाएं भी उपलब्ध हो सकेंगी।

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