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स्टेडियम अधूरा कैसे होगा खेल का सपना पूरा?

आजादी के पचहत्तर साल होने को है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर और ओलंपिक में भारत के खिलाड़ी पांच सिल्वर भी नहीं जीत पाते। गोल्ड की तो बात ही अलग है। और जीतें भी कैसे? देश के गावों और कस्बों में खेल सुविधाओं का क्या हाल है किसी से नहीं छुपा है। कहीं खेल परिसर है लेकिन उपयोग नहीं। कहीं अधूरा पड़ा है। ऐसा ही हाल उमरिया जिले के चंदिया कस्बे का है।

अधोसंरचना योजना के तहत 2019 में चंदिया कस्बे में स्टेडियम का निर्माण कार्य शरू किया गया था। शारीरिक व्यायाम और आउटडोर खेलों को प्रोत्साहत करना इसका उद्देश्य था लेकिन जब स्टेडियम अधूरा तो उद्देश्य कैसे पूरा होगा? स्टेडियम निर्माण की कछुआ चाल ने उद्देश्य और शासन की योजना दोनों पर पानी फेर दिया है। दो वर्ष बीत जाने के बाद भी स्टेडियम अधूरा है।

मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना योजना के अंतर्गत 2019 में स्टेडियम की नीव रखी गई थी। बिरसमुंडा चौक के समीप बारह एकड़ भूमि भी आवंटित कर दी गई। लेकिन निर्माण कार्य में सुस्ती और शासन के ढीले रवैये के कारण स्टेडियम का निर्माण अधूरा पड़ा है। निर्माण के नाम पर अभी सिर्फ बाउंड्री वॉल, पवेलियन और मीटिंग हाल ही निर्मित हो पाये है शेष कार्य अधूरा है।

जहां तक निर्माण एजेन्सी और प्रशासन की बात है तो दोनों एक दूसरे पर उंगली उठा रहे हैं। ठेकेदार पैसे की कमी का रोना रो रहे हैं तो प्रशासन कार्य की धीमी चाल पर प्रश्न खड़ा कर रहा हैैं। चंदिया नगर परिषद के प्रभारी अधिकारी, ठेकेदार को नोटिस देने की बात कर रहे हैं। जांच होगी और गड़बड़ी पाए जाने पर निर्माण करने वाले पर करीवाई की जाएगी। कुल मिलाकर चंदिया वासियों का स्टेडियम का सपना अभी अधूरा ही रहेगा। मेडल लाना और देश का नाम रौशन करना अभी दूर की कौड़ी है।

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