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बिजली कटौती से लोग हो रहे परेशान, व्यवसायियों को भी हो रही है मुश्किल

इंसान के लिए बिजली की क्या अहमियत है, इससे सभी परिचित हैं। बिजली की समस्या को लेकर प्रशासन का क्या रवैया रहा है इसे भी लोग अच्छी तरह जानते हैं। क्षेत्र में लगातार बढ़ती जा रही बिजली कटौती और बिजली संबंधित समस्याओं का हल ना होने से लगातार लोगों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। इस वर्ष बारिश की कमी से होने वाली गर्मी व उमस से और मच्छर-मक्खियों से लोग वैसे ही परेशान हैं। ऐसे में कई घंटों बिजली की कटौती और भी मुसीबतें बढ़ा रही है। लोग ना तो दिन में आराम से रह पाते हैं ना ही रात में चैन से सो पाते हैं।

धनपुरी के सरई कापा लाइन का भी यही हाल है। यहां भी घंटों बिजली की कटौती से लोग बुरी तरह परेशान है। यह क्षेत्र प्रदेश के पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक का विधानसभा क्षेत्र रहा है, इसके बाद भी यहां बिजली आपूर्ति का यह हाल है। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्षेत्र के अन्य इलाकों व गांव का क्या हाल होगा।

यूं तो बिजली की समस्या कोई नई नहीं है लेकिन बीते कुछ दिनों से बिजली कटौती में बढ़ोतरी हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों को केवल 10 से 15 घंटे बिजली मिल रही है। समस्या केवल बिजली कटौती की ही नहीं बल्कि मीटर में गड़बड़ी, लटकते हुए तारों और सड़कों में लाइट की व्यवस्था ना होने की भी है। इस विषय पर सीएम हेल्पलाइन पर रोज दर्जनों शिकायतें दर्ज की जाती है, लेकिन उन्हें हल करना तो दूर उन्हें देखा भी नहीं जाता।

धनपुरी की ही बात करें तो यहां सब स्टेशन से जुड़े हुए 11 किलो वाट की लाइन लगभग 5 किलोमीटर की है। लेकिन इसी लाइन को सुधारने में विद्युत कर्मचारियों को 4 से 6 घंटे लग जाते हैं। लोगों का कहना है की विद्युत विभाग में फोन लगाने पर कर्मचारी फोन ही नहीं उठाते हैं। यदि उठाते भी हैं तो समस्या को सुनने की वजाय उपभोक्ताओं की बात को टाल कर फोन काट देते हैं। विभाग के इस तरह के रवैया से लोग परेशान तो है ही साथ ही नाराज भी हैं।

इलाके में यहां वहां झूलते तार भी परेशानी का कारण है। लेकिन प्रशासन को इसकी कोई चिंता नहीं है। लटकते हुए तार, जर्जर ट्रांसफार्मर, टूटते हुए खंबे लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन सकते हैं। कार्यवाही के नाम पर प्रशासन शिकायतों को टाल देते हैं और स्थिति वैसे की वैसे ही बनी रहती है। बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए भी लोगों को इतनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्षेत्र के बाकी विभागों का क्या हाल होगा!

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