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70 हजार की आबादी वाले शहर में नहीं है बस स्टैंड, यात्रियों को होती है हर रोज परेशानी

कहने को तो धनपुरी नगर परिषद है, लेकिन इसकी स्थिति किसी कस्बे से बेहतर नहीं कही जा सकती। धनपुरी आज तक अपने बस स्टैंड के लिए इंतजार कर रहा है। 2001 में धनपुरी की आबादी लगभग 45 हजार थी, जो अब बढ़कर लगभग 70 हजार के आसपास पहुंच चुकी है। इतनी बड़ी आबादी वाले नगर परिषद में आज तक बस स्टैंड की सुविधा को लोग तरस रहे हैं।

धनपुरी के स्थानीय लोगों द्वारा कई बार विधायक, सांसद, जनप्रतिनिधियों, पार्षदों आदि से शिकायतें की गई लेकिन अभी तक उस पर कोई अमल नहीं किया गया है। हर चुनाव में जनप्रतिनिधियों द्वारा बस स्टैंड बनवाने का मुद्दा उठाया जाता है और चुनाव गुजरते ही हवा हो जाता है।

इतनी बड़ी आबादी वाला शहर आज तक बिना बस स्टैंड के ही गुजारा कर रहा है। पिछले कुछ समय से बस स्टैंड बनाए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय लोग लगातार अपने नेताओं पर जनता को

धोखा देने का आरोप लगा रहे हैं। शहर में सुंदरीकरण, विकास योजना आदि के लिए लंबे समय से लोग इंतजार कर रहे हैं।

शहर में बस स्टैंड की सुविधा ना होने से लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चाहे बरसात हो या चिलचिलाती धूप लोगों को घंटों बस के इंतजार में खुले आसमान के नीचे खड़ा रहना पड़ता है। बस स्टैंड ना होने से यहां शौचालय आदि की भी सुविधा नहीं है। जिससे लोगों को खासतौर से महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है।

बस स्टैंड न होने से बसें बीच सड़क पर खड़ी हो जाती हैं और सड़क पर लंबा जाम लग जाता है। कई बार तो यह भी होता है की बसें शहर में प्रवेश ना करके बाहर ही बाहर निकल जाती हैं और यात्री खड़े रह जाते हैं। बस स्टैंड ना होने से जो बसें शहर में नहीं आती हैं उनके यात्री पैदल चलकर शहर के बाईपास तक पहुंचते हैं और बस पकड़ते हैं। देश की आजादी को लगभग 70 साल बीत चुके हैं। 70 सालों से 70000 की आबादी वाला शहर बस स्टैंड न होने से असुविधा को झेल रहा है। और यही इंतजार कर रहा है कि कब उनके नेताओं की आंख खुलेगी और शहर अपना बस स्टैंड देख पाएगा।

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