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वैक्सीन महाभियानों के बाद भी 15 फीसदी लोगों को ही लगी वैक्सीन की दूसरी डोज, थर्मल स्कैनर सैनिटाइजर भी हुए गायब, अब तीसरी लहर का दिखाया जा रहा डर

कोरोना महामारी से बचने के लिए अनूपपुर जिले में कई तरह के प्रबंधक हुए। उनमें से कुछ सफल भी रहे और कुछ औसत सफल रहे। कोरोना की दूसरी लहर के समय जिले में इसी तरह का फैसला लेते हुए लाकडाउन लगाया गया जो काफी हद तक सफल भी रहा। लॉकडाउन के कारण 75 दिनों से जिले में एक भी कोरोना केस नहीं देखा गया था। लेकिन 5 सितंबर को फिर से कोरोना के दो केस सामने आए। जानकारी है कि यह दोनों ही व्यक्ति दूसरे प्रदेश से अनूपपुर आए थे।

लंबे समय बाद जिले में कोरोना केस मिलने से फिर से लोगों में कोरोना की तीसरी लहर फैलने का आशंका जताई जा रही है। भला क्या कारण है, इतने लंबे समय से अनूपपुर जिला कोरोना मुक्त हो चुका था और फिर अचानक से कोरोना केस सामने आ गये? क्या लोगों द्वारा कोरोना का पालन नहीं किया जा रहा है या प्रशासन उचित प्रबंध करने में अनदेखी कर रहा है? घनी आबादी वाले अनूपपुर शहर में क्या सोशल डिस्टेंसिंग का नियम कारगर हो सकता है?

कोरोना महामारी से बचने का सबसे ठोस उपाय वैक्सीन ही है। लेकिन जिले में वैक्सीन अभियानों का यह हाल है कि अभी तक केवल 15 फ़ीसदी लोगों को वैक्सीन की दूसरी खुराक मिली है। कोरोना वैक्सीन के महाभियानो, जागरूकता कार्यक्रम और अन्य नियमों के बाद भी अभी तक जिले की 85% आबादी वैक्सीन से अछूती है। यह आंकड़ा भी केवल 18 वर्ष से ऊपर के आबादी का है। यानी 18 वर्ष से नीचे के बच्चे पूरी तरह से वैक्सिंग से अछूते हैं।

प्रशासन से पूछने पर वही नपा तुला जवाब मिल जाता है कि जिले को प्रदेश द्वारा उचित मात्रा में टीके नहीं दिए जा रहे हैं। प्रशासन की इस बात को मान भी लिया जाए तो भी स्थिति स्पष्ट नहीं होती। क्योंकि पहले जहां प्रशासन द्वारा कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर थर्मल स्कैनिंग की, सैनिटाइजर की और लोगों को निर्देशित करने वाले अधिकारियों की व्यवस्था थी, वह भी पूरी तरह गायब हो चुकी है। बस स्टैंड हो या रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालय हो या स्कूल हो कहीं भी ना तो सैनिटाइजर देखने को मिलता है, न थर्मल स्कैनर।

स्टेशनों और बस स्टैंड से हजारों की संख्या में यात्री जिले से बाहर जाते हैं और बाहर से जिले में आते हैं। ये अपने साथ कोरोनावायरस फिर से ला सकते हैं। इसके बावजूद भी स्टेशनों और स्टैंड बस स्टैंड पर भी इसकी कोई व्यवस्था नहीं है। क्या प्रशासन की आंख तब खुलेगी जब जिले में कोरोनावायरस पूरी तरह फैल चुका होगा।

जिले के पूर्व कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर द्वारा समय रहते जिले में लॉक डाउन लगाया गया था। केवल इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने केंद्र और राज्य के आदेश की इंतजार किए बिना जिले में लॉकडाउन लगा दिया था। इसी का नतीजा था अनूपपुर जिला लंबे समय तक कोरोना से बचा रहा। लेकिन वर्तमान कलेक्टर सोनिया मीना द्वारा ऐसी कोई कार्यवाही नहीं की गई है जिससे जिले को कोरोना महामारी की तीसरी लहर से बचाया जा सके।

अगर कलेक्टर ऑफिस और जिला प्रशासन समय से कार्यवाही करे, नियमों में सख्ती लाए, थर्मल स्कैनर और सैनिटाइजर व्यवस्थाओं को पुनः चालू करे और वैक्सीन अभियान में तेजी लाए तो संभव है जिला कोरोना की तीसरी लहर से बच सकता है।

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