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प्रदेश में नहीं है सार्वजनिक बस सेवा, निजी बस सेवाओं की भी बदहाल है स्थिति

बरसों पहले मध्य प्रदेश प्रशासन ने अपनी सार्वजनिक बस सेवा का निजीकरण कर दिया था। परिणाम यह हुआ कि मेट्रो शहरों की मेट्रो बस सेवा को छोड़ दें तो प्रदेश में कहीं भी सार्वजनिक बस सेवा उपलब्ध नहीं है। निजी व्यवसायियों द्वारा जो बस सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, उनकी स्थिति भी अच्छी नहीं कही जा सकती। निजी बसें यात्रियों को ना तो आरामदायक सफर दे पाती हैं और ना ही कम कीमत पर यात्रा करा पाती हैं। निजी बस सेवाएं मनमाने तरीके से बसों का किराया निर्धारित करती हैं और लोगों को मजबूरी के कारण निर्धारित किराया देकर सफर करना पड़ता है।

डीजल पेट्रोल के लगातार बढ़ रहे दाम भी इसका कारण है। यह भी देखा गया है की महंगे होते पेट्रोल के दामों से बस मालिका घटिया स्तर का तेल इस्तेमाल कर बसें चला रहे हैं जिससे जहरीला धुआं निकलता है जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है। इतना ही नहीं, त्योहारों के सीजन में बसें ओवरलोडेड हो जाती है और हादसे का शिकार होती हैं। बसों की ना तो सही समय पर मरम्मत की जाती है ना ही अच्छी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है।

दूसरे प्रदेशों में आज भी राज्य सरकार द्वारा बस सेवाएं दी जा रही है। जबकि प्रदेश में सार्वजनिक बस सेवा लंबे समय से बंद है। लंबे रूट की बसों में तो अच्छी सुविधाएं होती हैं लेकिन ग्रामीण इलाकों में निजी व्यवसायी घटिया स्तर की बसों का इस्तेमाल करते हैं। जिससे लोगों को असुविधा तो होती है साथ ही दुर्घटनाएं भी ज्यादा मात्रा में होती है।

उमरिया एक आदिवासी बहुल इलाका है जहां की 60% से भी ज्यादा आबादी बस के द्वारा ही सफर करती है। निजी बसों का मनमाना किराया, खराब सुविधाएं और भीड़भाड़ की समस्या से लोगों को हर रोज दो चार होना पड़ता हैं। हाल ही की बात है इसी वर्ष फरवरी में मानपुर के कठार गांव में इसी तरह की ओवरलोड एक बस दुर्घटना का शिकार हो गई, जिसमें एक 4 माह की छोटी बच्ची की मृत्यु हो गई। यह कोई पहली और आखिरी घटना नहीं है इस तरह के हादसे आए दिन देखने में आते हैं। इसके बाद भी प्रशासन आंख मूंद कर बैठा हुआ है।

यात्रा की अच्छी सुविधा प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन प्रशासन ने बस सेवा को पहले ही निजी व्यक्तियों के हाथों बेच दिया है।इसका खामियाजा आम आदमी भुगत रहा है। आरटीओ विभाग की माने तो उमरिया में हर रोज 80 से ज्यादा बसें चलती हैं। लेकिन अच्छी सुविधा के नाम पर यह कुछ भी नहीं देती हैं और मनमाना किराया वसूलती हैं।

जिले के परिवहन अधिकारी संजय श्रीवास्तव का कहना है कि प्रशासन द्वारा बनाए गए नियमों के तहत ही निजी बस सेवाओं को चलाया जाना चाहिए। वरना निजी बस मालिकों के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाएगी। प्रशासन के द्वारा जब तक कार्यवाही की जाएगी तब तक ना जाने कितनी बसें दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी होंगी और आम आदमी इनका शिकार होता रहेगा।

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