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मुख्यमंत्री के ऑनलाइन समाधान कार्यक्रम के चलते अधिकारी वर्ग ने खोली आंखें, कलेक्टर ने विभागों को दिए काम पूरा करने के निर्देश

7 सितंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ऑनलाइन समाधान कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न विभागों के कामों की समीक्षा करेंगे। वह शिकायत कर्ताओं से बात भी करेंगे और विभागों से उनके काम का हिसाब भी मांगेंगे। मुख्यमंत्री के इसी फैसले के बाद अधिकारी वर्ग में अफरा तफरी मची हुई है। हर जिले में कलेक्टर, अपर कलेक्टर, सचिव, आयुक्त आदि बैठक करने में जुटे हुए हैं। ऐसा ही नजारा उमरिया कलेक्टर ऑफिस में भी देखा गया।

उमरिया के जिला कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने सोमवार को विभिन्न विभागों की एक समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने सभी विभाग के अधिकारियों को समय पर काम पूरा करने के सख्त आदेश दिए। कलेक्टर द्वारा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से खासतौर से रिपोर्ट मांगी गई। खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों व सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ अभियान चलाने की भी बात कही गई।

कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को भी कहा है कि खाद्य एवं औषधि निरीक्षक का रोस्टर तैयार किया जाना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा संख्या में सैंपलिंग की कार्यवाही होनी चाहिए। मोबाइल वाहन के साथ ही ऑनलाइन माध्यमों से शासकीय दुकानों की जांच की जानी चाहिए।

कलेक्टर द्वारा शिक्षा विभाग को भी सख्त आदेश दिए गए। कलेक्टर ने स्कूली विद्यार्थियों की टीसी और मार्कशीट जारी न करने के संबंध में अधिकारियों को फटकार लगाई। इस समस्या को हल करने के लिए सेल गठित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने विभिन्न विभाग के अधिकारियों को यह भी बताया की सीएम हेल्पलाइन के तहत दर्ज शिकायतों को हल न करने पर संबंधित अधिकारी के वेतन में कटौती की जाएगी।

जाहिर है कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के ऐलान के बाद अधिकारी वर्ग अपने-अपने विभागों की कमियों को ढकने में लगा है। मुख्यमंत्री के भी 1 दिन के कार्यक्रम में औपचारिक तौर से अधिकारियों की शिकायतें दर्ज कराई जाएंगी और उनके खिलाफ कार्यवाही का प्रदर्शन किया जाएगा। अगले दिन से स्थिति फिर वही हो जाएगी।

बैठकों और कार्यक्रमों के दौर लंबे समय से चलते आ रहे हैं, लेकिन आम आदमी की समस्याएं वही की वही रह जाती हैं। प्रशासन की व्यवस्थाओं का मारा हुआ आदमी कार्यालयों और विभागों में ही भटकता रह जाता है।

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