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नगर परिषद भर्ती घोटाले का बढ़ता बवाल, अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर आंदोलनकारी, संभागायुक्त ने दिए जांच के निर्देश

लगभग 1 वर्ष पहले शहडोल व अनूपपुरपुर जिले में चार नई नगर परिषदों का गठन किया गया था। इन्हीं नगर परिषदों में कर्मचारियों की भर्ती को लेकर गड़बड़ी का मामला सामने आया था। युवा कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया है। इसी के खिलाफ 1 सितंबर से युवा कांग्रेस, शिवसेना सहित कई संगठन अनेकों स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

आंदोलन में संघर्ष समिति नामक संगठन की भूमिका अहम् बताई जा रही है। संघर्ष समिति के अध्यक्ष नवीन सिंह से हमारी हुई बातचीत में कई राज सामने आये। नवीन सिंह ने बताया कि बकहो नगर पंचायत के 15 पदों पर नियुक्ति की जानी थी। जबकि 57 लोगों को भर्ती कर दिया गया है।

आंदोलन कारियों का कहना है कि भर्ती में भाई भतीजावाद और रिश्वतखोरी हुई है। जैसे पंचायत के रोजगार सहायक संतोष तिवारी के भाई सुभाष तिवारी , संघ नेता अभय तिवारी, जेडी ऑफिस के डिप्टी डायरेक्टर के बेटे आदिल खान, आदि की थ्री ग्रेड में नियुक्ति की गयी है।

दैनिक वेतनभोगी के पद पर भी क्षेत्र के मंडल अध्यक्ष की पत्नी, बीजेपी के पूर्व नगर मंत्री, महामंत्री, आदि की नियुक्ति कर दी गयी है। मानो प्रशासन की ओर से कोई अभियान चलाया जा रहा हो कि बीजेपी में आओ नौकरी पाओ। संघर्ष समिति ने 3 अगस्त को सीएमओ को ज्ञापन सौंपा था। साथ ही 15 दिन में कारवाही करने के लिए भी कहा था।

लेकिन जब कोई एक्शन नहीं लिया गया तब 27 अगस्त को समिति ने सांकेतिक प्रदर्शन किया। फिर भी जब उनकी बात नहीं सुनी गयी तब 1 सितम्बर से वे अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। भूख हड़ताल करने वालों में नवीन सिंह, उमेश यादव, ब्रजेश सोनी, सुबोध महतो, ज्ञानेंद्र आदि शामिल हैं।

पिछले 10 दिनों से चल रहे प्रदर्शन पर अभी तक प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया था। लेकिन पिछले दिन संभागायुक्त और विभिन्न जिलों के कलेक्टर के साथ हुई बैठक में इस विषय पर आयुक्त द्वारा रिपोर्ट मांगी गई।

संभाग आयुक्त राजीव शर्मा ने नगरी प्रशासन के संयुक्त संचालक मकबूल खान को निर्देश दिए है कि नगर परिषद में कर्मचारियों की भर्ती के मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जाए, और जल्द से जल्द उसकी रिपोर्ट आयुक्त कार्यालय को सौंपी जाए। संभागायुक्त का यह भी कहना है कि अगर जांच में कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

लेकिन प्रदर्शनकारी संभागायुक्त के इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि संभागायुक्त ने उन्ही लोगों को जांच के आदेश दिए हैं जो इस घोटाले में शामिल हैं । ऐसी स्थिति में प्रदर्शनकारियों का मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष और सही जांच नहीं हो सकेगी।

रोचक बात यह है कि इस प्रदर्शन में युवा कांग्रेस व शिवसेना का साथ भाजपा दल के कुछ स्थानीय नेताओं ने भी दिया। बताया जा रहा है कि भाजपा नेता शैलेंद्र श्रीवास्तव द्वारा इस विषय में पहले ही शिकायत दर्ज कराई जा चुकी थी। शैलेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि उन्हें संभागायुक्त और न्यायालय पर तो पूरा भरोसा है लेकिन नगरीय प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर भरोसा नहीं है।

उनका मानना है कि पूरे मामले की जांच नगरीय प्रशासन द्वारा नहीं बल्कि स्थानीय जेडी कार्यालय के स्तर पर की जानी चाहिए। तभी सच्चाई सामने आ सकेगी। शैलेंद्र श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि यदि नगरीय प्रशासन द्वारा मामले की जांच में कुछ गड़बड़ी की गई तो उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा।

अस्वीकरण-उपरोक्त जानकारी और लोगों द्वारा कही गई बात का वोकल न्यूज़ शहडोल दायी नहीं है

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