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शहडोल के कई इलाकों में आज तक नहीं बन पाई हैं सड़कें, लोग चारपाई पर मरीज को ले जाने पर हुए मजबूर

बड़े ही शर्म की बात है कि देश को आजाद हुए 70 साल से भी ज्यादा का वक्त गुजर चुका है लेकिन आज भी यहां कई गांव और बस्तियां ऐसी हैं जहां के लोग आज तक सड़क नहीं देख पाए हैं। आज तक यहां सड़कों का निर्माण नहीं हो सका है। सड़क न होने की वजह से इन ग्रामीण वासियों को कितनी मुसीबतों का सामना करना पड़ता होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

लोगों को दूसरे स्थान जाने के लिए, बच्चों को स्कूल जाने के लिए, फेरी वालों को दूसरे गांव जाने के लिए पगडंडियों, खेतों, जंगलों और नदी नालियों को पार करके जाना पड़ता है। इतना ही नहीं यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो उसे खाट पर लिटा कर अस्पताल ले जाना पड़ता है।

इसी तरह का एक मामला शहडोल जिले में भी सामने आया है। शहडोल और अनूपपुर जिले को जोड़ने वाली सीमा के कुछ गांव ऐसे हैं जहां आज तक सड़क नहीं बन पाई है। दोनों जिलों की सीमा पर लगने वाले सोहागपुर जनपद के तहत आने वाली ग्राम पंचायत बेम्होरी और ग्राम पटना को जोड़ने के लिए आज तक सड़क नहीं बन पाई है। बीते दिन घटित घटना ने प्रशासन को शर्मसार कर दिया है।

बैम्हौरी की रहने वाली 68 वर्षीय प्रेमवती जो पड़ोस के गांव पटना से लौट रही थीं बीच रास्ते में अचानक उनकी सेहत खराब हो गई। सड़क व्यवस्था न होने से उनके बेटे और पोतों ने किसी तरह एक खाट का प्रबंध करके उन्हें उस पर लिटाया और अस्पताल तक ले गए। ऐसी स्थिति में अगर प्रेमवती को अस्पताल पहुंचने में थोड़ी देर हो जाती तो समस्या और बड़ी हो सकती थी। प्रेमवती के बेटों ने बताया कि वे एक आंख से अच्छी तरह देख भी नहीं पाती हैं।

सड़क ना होने से दुपहिया वाहन पगडंडियों और नालियों से होकर गुजरते हैं और अक्सर हादसे का शिकार हो जाते हैं। वैसे तो बेम्हौरी से पटना गांव तक की दूरी केवल 3.4 किलोमीटर के लगभग है लेकिन प्रशासन की अनदेखी का हाल देखिए कि आजादी के 70 वर्ष बाद भी यह साढ़े तीन किलोमीटर की सड़क आज तक नहीं बन पाई है।

दोनों गांव के बीच एक नाला भी पड़ता है जिसमें ना तो कोई पुल की व्यवस्था है ना आर पार जाने का कोई साधन। लोगों को घुटने और कमर तक डूब कर इसे पार करना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह नाला भी जानलेवा बन जाता है। कुछ दिनों पहले प्रशासन द्वारा किये गए गड्ढे में एक मोटरसाइकिल चालक अपनी मोटरसाइकिल सहित गिर गया था जिसे काफी चोट भी आई थी।

सड़क जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए भी लोग आज तक इंतजार कर रहे हैं देश की आजादी से अब तक दो तीन पीढ़ियां गुजर चुकी हैं जो बिना सड़कों के ही गुजारा कर रही हैं इलाके की जनता इतनी पढ़ी-लिखी और जागरूक नहीं है कि वह इस विषय में कोई ज्ञापन दे सके या आंदोलन कर सके। प्रशासन भी इसे अच्छी तरह समझता है और अब तक आंख मूंद कर बैठा है।

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