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मिलिंग नियमों और अनुबंधों की उड़ रही धज्जियां, गोदामों में जमा किया जा रहा टूटन चावल, क्रॉस मूवमेंट के जरिए भी मुनाफाखोरी में जुटे मिलर

शहडोल में फसल रखरखाव और उनके भंडारण की स्थिति बदतर होती जा रही है। अब जबकि इस मानसून की खरीफ फसलें भी कटने को तैयार हैं, अभी तक पिछले वर्ष की धान व अन्य फसलों का ही रखरखाव व मिलिंग नहीं पूरी हो सकी है। धान के भंडारण और मिलिंग काम में भी भारी गड़बड़ी और घोटाला सामने आ रहा है।

फसलों की रखरखाव का आलम यह है कि हर साल हजारों क्विंटल धान बारिश और मौसम की मार से खराब हो जाती है। वहीं बची हुई धान के भी रखरखाव में गड़बड़ी की जाती है। इसी तरह का मामला शहडोल में भी सामने आया है।

शासन द्वारा जारी धान मिलिंग की गाइड लाइन की धड़ल्ले से नाफरमानी की जा रही है। उत्तम कोटि के चावल में जहां 25 फ़ीसदी टूटन चावल होना चाहिए वही 40 से 45 फ़ीसदी तक टूटा चावल मिलाकर गोदामों में जमा किया जा रहा है। प्रशासन द्वारा ना तो तय समय पर धान की मिलिंग की जा रही है और ना ही किसानों को उनके अनाज का भुगतान किया जा रहा है।

पिछले वर्ष की बात करें तो शासन द्वारा 12 लाख 85 हजार एमटी धान की खरीद की गई थी। लेकिन आज तक उसकी पूरी तरह मिलिंग नहीं हो पाई है। जानकारी है कि अब तक केवल 4.5 लाख एमटी धान की मिलिंग हो सकी है।

सरकार द्वारा कृषि के क्षेत्र में लगातार बदलते नियम किसानों और मिलर लोगों के लिए भी परेशानी बन चुके हैं। किसान जहां फसलों की अलग-अलग कीमत की मांग करते हैं वहीं मिलर भी नई दरों पर मिलिंग करने पर अड़ जाते हैं। इतना ही नहीं बल्कि क्रॉस मूमेंट के जरिए भी मिलर द्वारा घोटाला किया जा रहा है।

क्रॉस मूमेंट एक ऐसी विधि है जिसमें फसल नजदीक के गोदाम में ना रखवा कर दूर के गोदाम में रखवाई जाती है। ताकि फसलों के लाने ले जाने का भाड़ा, तेल पेट्रोल की कीमत भी वसूली जा सके। वहीं गोदामों में भी एफसीआई के मानकों का पालन नहीं हो रहा है। गोदामों में घटिया क्वालिटी का चावल रखवाया जा रहा है। इसके साथ ही क्रॉस मूवमेंट के जरिए शहडोल का चावल कहीं जयसिंहनगर जयसिंह नगर का चावल कहीं गोहपारू और गोहपारू का चावल कहीं शहडोल में रखवाया जा रहा है।

खाद्य विभाग के अधिकारी ना तो एफसीआई के नियमों का पालन करते हैं न मिलिंग अनुबंधों का और ना ही फीफो की गाइडलाइन का। मनमाने तरीके से फसलों की खरीद, उनका रखरखाव और मिलिंग की जा रही है।

इस पूरी अव्यवस्था का खामियाजा किसानों और देश की जनता को भुगतना पड़ता है। किसानों को ना तो समय पर उनका भुगतान किया जाता है और ना ही सही प्रबंधन के कारण फसल का रखरखाव हो पाता है। हर साल लाखों क्विंटल फसलें खराब हो जाती हैं और देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।

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