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सरकारी अस्पतालों की बद्तर स्थिति, न डॉक्टर न मशीनें, परेशान हो रहे मरीज

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और अस्पताल लगातार प्रशासन की अनदेखी से बदतर स्थिति को पहुंचते जा रहे हैं। धनपुरी स्वास्थ्य केंद्र का भी कुछ ऐसा ही हाल है। यूं तो धनपुरी को वर्षों पहले उसका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिल चुका था। इस स्वास्थ्य केंद्र में बीस बिस्तरों का इंतजाम भी है, लेकिन अस्पताल में ना तो डॉक्टरों की सुविधा है न ही स्वास्थ्य उपकरणों की। इमारत भी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है।

धनपुरी स्वास्थ्य केंद्र पर धनपुरी सहित आसपास के अनेकों गांव निर्भर हैं। लेकिन अस्पताल की स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि लोग इलाज के लिए परेशान हो रहे हैं। इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में केवल एक डॉक्टर कार्यरत हैं। वे भी शहडोल में रहते हैं और दोपहर एक-दो बजे अस्पताल पहुंचते हैं। मरीज सुबह से धूप और बारिश को झेलते हुए डॉक्टर का इंतजार करते हैं। डॉक्टर के आने के बाद भी मरीज का उपचार हो पाएगा या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है।

इस सामुदायिक अस्पताल में हजारों लोग अपना इलाज कराने के लिए आते हैं लेकिन स्थिति यह है कि यहां केवल एक ही डॉक्टर कार्यरत हैं जो अपनी मनमर्जी से अस्पताल आते हैं। वर्तमान में डॉक्टर सचिन कारकुर इस पद को संभाल रहे हैं। मरीज भूखे प्यासे सुबह से दोपहर तक डॉक्टर का इंतजार करते रहते हैं और यदि मरीजों की संख्या बढ़ जाए तो कई बार उनका इलाज भी नहीं हो पाता है।

यहां तक कि अस्पताल में स्त्री रोग डॉक्टर तक की भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। धनपुरी अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ सहित छह डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं लेकिन प्रशासन की लापरवाही देखिए कि अस्पताल की स्थापना से लेकर अब तक इन पदों पर किसी भी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है। स्त्री रोग डॉक्टर न होने से महिलाओं को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि महिलाएं सरकारी अस्पताल में इलाज न करा कर निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं। निजी अस्पतालों में भारी पैसा देकर उन्हें इलाज कराना पड़ रहा है।

अस्पताल में डॉक्टर और इलाज की सुविधा न हो पाने की वजह से स्थानीय लोगों को भी शहडोल जिला चिकित्सालय तक सफर करके आना पड़ता है और परेशान होना पड़ता है। अस्पताल की इमारत भी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। न तो समय पर इसकी मरम्मत की जाती है और न ही सही तरीके से देखभाल की जा रही है।

एक साल पहले एक निजी ठेकेदार को अस्पताल की मरम्मत का टेंडर पास किया गया था। मरम्मत के लिए लाखों रुपए भी दिए गए थे लेकिन अभी तक अस्पताल में मरम्मत का काम नहीं हो सका है। वहीं ठेकेदार बिना काम के ही बिल बनाकर सरकार का पैसा अपनी जेब में डाल रहे हैं।

अस्पताल की खिड़कियां, दरवाजे, बिजली के बोर्ड, पेयजल की मशीन सब खराब हो चुकी हैं। ऐसी स्थिति को देखकर धनपुरी के स्थानीय लोगों ने कई बार सीएम हेल्पलाइन और संबंधित विभाग से शिकायत की। लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई। यहां तक कि राजनीतिक दलों ने भी कई बार अनशन, आंदोलन, चक्का जाम करके प्रशासन का ध्यान इस ओर खींचना चाहा लेकिन तब भी कोई बात नहीं बनी।

आखिरकार क्षेत्र की जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आनंद मोहन जायसवाल उपाध्यक्ष राम सिंह व मंडल अध्यक्ष आशीष पटेल ने शहडोल के कलेक्टर को पत्र लिखकर इस बात की शिकायत की है और अस्पताल की मरम्मत व डॉक्टरों की कमी पूरी किए जाने के संबंध में मांग की है।

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