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3 माह से बंद है 70,000 परिवारों को केरोसिन की सप्लाई, लाइसेंस के सरेंडर होने से आई समस्या

उमरिया जिले में हजारों परिवार ऐसे हैं जिन्हें केरोसिन की आपूर्ति होती है। सिंचाई कार्य में, रसोई में, रात में लालटेन आदि जलाने में केरोसिन का इस्तेमाल लोगों द्वारा किया जाता है।

ग्रामीण इलाकों में वैसे ही बिजली की समस्या बनी रहती है और बरसात में यह और भी बढ़ जाती है, ऐसी स्थिति में केरोसिन ही गरीब परिवारों का सहारा था।

लेकिन पिछले 3 महीनों से शासकीय राशन दुकानों द्वारा केरोसिन नहीं बांटा जा रहा है। कारण यह बताया गया है कि डीलर द्वारा लाइसेंस सरेंडर कर दिया गया है।

पूरे उमरिया जिले में लगभग 6:30 लाख की आबादी रहती है जिसमें से 1.26 लाख राशन कार्ड धारी परिवार हैं। इनमें से भी लगभग 80% लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।

इनमें से अधिकतर परिवार को उज्जवला गैस कनेक्शन भी नहीं मिला हुआ है। गैस कनेक्शन मिलने के बाद भी सिलेंडर दाम इतने ज्यादा हैं कि गरीब लोग उसे नहीं खरीद पा रहे हैं।

ऐसी स्थिति में केरोसिन ही रसोई के लिए सिंचाई के लिए, प्रकाश के लिए गरीबों का सहारा था और अब केरोसिन सप्लाई बंद होने से ग्रामीण लोगों को कई प्रकार की मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।

सिंचाई न हो पाने की वजह से जहां फसलें खराब हो रही हैं वहीं बरसात में बिजली की समस्या बढ़ जाने से लोगों को अंधेरे में ही रात काटनी पड़ रही है। रात में रोशनी न होने की वजह से बरसाती कीड़ों और जहरीले जंतुओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

पूरे जिले में 70000 ऐसे कार्डधारी परिवार हैं जिन्हें केरोसिन मिलता था लेकिन अब केरोसिन न मिलने की वजह से इन 70000 परिवारों यानी लगभग तीन लाख की आबादी को कई प्रकार की मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में जिले में 254 राशन की दुकानें हैं जिनके माध्यम से केरोसिन बांटा जाता है।

जिले में कई गांव ऐसे हैं जहां आज तक बिजली भी नहीं पहुंच पाई है। अगर बिजली है भी तो कई घंटों की कटौती होती है। जिससे प्रकाश करने के लिए केरोसिन आवश्यक हो जाता है।

उमरिया जिले के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिकारी बीएस परिहार का कहना है कि लाइसेंस सरेंडर करने की वजह से यह असुविधा हुई है और प्रशासन इसकी वैकल्पिक व्यवस्था कर रहा है। जल्द ही केरोसिन आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

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