Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on pinterest

देवांता अस्पताल में डॉक्टरों की शर्मनाक हरकत, मृत्यु के बाद भी पैसे वसूलने के लिए शव को रखा वेंटीलेटर पर

शहडोल के मशहूर देवांता हॉस्पिटल में डॉक्टर व प्रबंधक की बड़ी ही गैर जिम्मेदाराना और शर्मनाक हरकत सामने आई है। डॉक्टर व प्रबंधक पर आरोप है कि इन्होंने अनूपपुर की एक महिला के इलाज में पहले तो लापरवाही बरती फिर उसकी मृत्यु के बाद उसके शव को वेंटिलेटर पर रखकर पैसे वसूल दे रहे।

इस मामले के बाद डॉक्टर बृजेश पांडे व प्रबंधक वीके त्रिपाठी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। शहडोल के कलेक्टर द्वारा भी इस विषय पर संज्ञान लेते हुए 4 सदस्यों की एक कमेटी गठित कर दी गई है।

अनूपपुर जिले की जैतहरी जनपद की महिला पुष्पा राठोर को 13 सितंबर को देवांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जानकारी के अनुसार महिला ने किसी जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। इलाज के दौरान लगातार महिला की तबीयत खराब होती गई और उसकी मौत हो गई।

महिला के परिवारजनों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों द्वारा महिला की मृत्यु के बाद भी उनके शव को घंटों तक वेंटिलेटर पर रखा गया और पैसे वसूलते रहे। इसके बाद उन्हें बिलासपुर के अपोलो अस्पताल रेफर किया गया।

इस पूरे मामले के दौरान अस्पताल द्वारा महिला के पति संतोष कुमार राठौर से बहुत सारे पैसे भी वसूल कर लिए गए। संतोष कुमार राठौर ने बताया कि अस्पताल द्वारा 13 सितंबर को उनसे बीस हजार रुपए जमा कराए गए अगले दिन फिर से बीस हजार जमा कराए गए और डायलिसिस, सीटी स्कैन, वेंटिलेटर आदि के खर्चे के रूप में लगभग डेढ़ लाख रुपए उनसे वसूल किए गए।

21 सितंबर को महिला के पति संतोष से चौंसठ हजार रुपए जमा कराने के लिए कहा गया, इसके बाद 22 सितंबर को फिर से पैसे जमा करने के लिए कहा गया। पूरी इलाज प्रक्रिया के दौरान संतोष कुमार से दो लाख से भी ज्यादा की रकम वसूली गई।

महिला के परिजन ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रशासन ने आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज करने से भी मना कर दिया और नगद इलाज कराने के लिए मजबूर किया। संतोष कुमार राठौर ने बताया कि अस्पताल प्रबंधक ने उनसे चार-पांच कोरे कागजों पर धोखे से हस्ताक्षर करा लिए और तरह-तरह से पैसे वसूलते रहे।

इस पूरे मामले की खबर जब कलेक्टर तक पहुंची तो उन्होंने भी जांच के लिए 4 सदस्यों की एक टीम के गठन का आदेश दिया है। इस टीम में अपर कलेक्टर, सीएमएचओ, जिला चिकित्सालय के विशेषज्ञ डॉक्टर मुकुंद चतुर्वेदी और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष डॉक्टर एससी त्रिपाठी शामिल हैं। कलेक्टर ने दो दिन के भीतर मामले की जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

इस तरह की घटना यह बताती है कि इंसान पैसों के लिए कितना गिर सकता है। निजी अस्पतालों द्वारा लोगों को मजबूर करके पैसे वसूलने की यह कोई पहली घटना नहीं है। प्रशासन द्वारा इस विषय में सख्त कार्यवाही की दरकार है।

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on pinterest

साझा करें

ताजा खबरें

सब्सक्राइब कर, हमे बेहतर पत्रकारिता करने में सहयोग करें