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जिला कलेक्टर ने देवांता अस्पताल केस की कार्यवाही के लिए CMHO को दिया आदेश, कहा अपराधियों को दी जायगी कड़ी सजा

23 सितम्बर को यह खबर सामने आई थी कि शहडोल जिले के देवांता अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा किये गए इलाज की लापरवाही के चलते एक महिला की मृत्यु हो गई थी। साथ ही अस्पताल प्रशासन पर जबरन पैसे वसूलने और धोखाधड़ी करने का मामला भी दर्ज किया गया था।

इस खबर से हमने आपको पहले भी रूबरू कराया था किन्तु कल यानि के सोमवार 27 सितम्बर को जिला कलेक्टर वंदना वैद्य का वीडियो सामने आया है, यह वीडियो जनसंपर्क की ओर से जारी किया गया है, जिसमे उन्होंने हमारे देश, हमारी संस्कृति में डॉक्टर्स के महत्व और स्थान के बारे में बताया। उन्होंने कहा है की इस देश में डॉक्टर्स को पूजा जाता है और उन पर भरोसा किया जाता है।

पर अगर कोई अस्पताल प्रशासन द्वारा संगठित अपराध की खबर सामने आती है ,तो मुख्यमंत्री का सख्त आदेश है कि उस मामले पर कड़ी से कड़ी सजा अपराधियों को दी जानी चाहिए।

जांच-पड़ताल के समय अस्पताल में पाई गयी कमियां- जिला कलेक्टर का कहना है कि ज़हरीली दवा के सेवन के कारण अस्पताल में भर्ती महिला के इलाज से पहले डॉक्टर को इस खबर की सूचना प्री-इमरजेंसी रजिस्टर में दर्ज कर थाने में खबर करनी थी, जो उन्होंने नहीं किया।

अस्पताल प्रशासन द्वारा सबसे पहली लापरवाही यह रही। इसके अलावा कलेक्टर ने कहा कि सभी निजी अस्पतालों को अपने यहां एक रेड लिस्ट भी लगानी चाहिए जिससे अस्पताल में हर आने-जाने वाले व्यक्ति को अस्पताल में ऐसे सेंसिटिव मामलों की खबर हो सके।

घटना के बाद प्रशासन द्वारा की गई जाँच-पड़ताल में अस्पताल में इन सभी महत्वपूर्ण चीज़ो की कमी रही। इलाज में की गई लापरवाही पर अपराधी डॉक्टर्स को आईपीसी की धारा के अंतर्गत रजिस्टर किया गया है।इस वीडियो के माध्यम से यह कहा गया है की अस्पताल के सीएमएचओ को इस पूरी घटना के मामले की कार्यवाही का काम सौंपा जा चुका है।

साथ ही उन्हें यह आदेश भी दिया गया है कि जिला के सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स की समय-समय पर निगरानी की जायगी और अगर झोलाछाप डॉक्टर्स इन अस्पताओं में काम करते देखे गए, तो तुरंत ही उन पर सख्त कार्यवाही कर कड़ी से कड़ी सजा भी दी जायगी।

फिलहाल यह देवांता अस्पताल सील कर दिया गया है। और यहां भर्ती मरीज़ो को जिला अस्पताल में शिफ्ट करा दिया गया है। आशा है कि, इन सभी कड़े कानूनों के बाद जिले के किसी भी अस्पताल में अब ऐसी लापरवाही देखने को नहीं मिलेगी।

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