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जारी है हाथियों का आतंक, फिर से तोड़ी मकानों की दीवारें, फसलों को किया बर्बाद

बीते दिन छत्तीसगढ़ से हाथियों के एक दल की मध्य प्रदेश में प्रवेश करने की खबर सामने आई थी। 39 हाथियों का यह दल छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ जंगलों से मध्य प्रदेश के अनूपपुर के टाकी जंगलों में दाखिल हुआ था और रास्ते में पड़ने वाले खेतों और बस्तियों को नुकसान पहुंचाया था। रात भर हाथियों का यह दल आराम करता रहा लेकिन अगले ही दिन फिर सक्रिय हो गया।

टाकी बीट के जंगलों से 2 किलोमीटर की दूरी तय करके हाथियों का यह दल डूमर कछार पहुंचा और रास्ते में पड़ने वाले खेतों की फसलों को रौंद डाला साथ ही कई मकानों की दीवारों को भी नुकसान पहुंचाया है।

जानकारी है कि हाथियों का दल टाकी बीट के जंगल से होता हुआ सेमरा बीट पहुंचा और पास ही के सैतिनचुआ गांव के मकान को नुकसान पहुंचाया।

गांव के जय सिंह, लाल सिंह व ज्ञान सिंह के खेतों में लगी फसलों को भी नुकसान पहुंचाने की खबर सामने आई है। गांव के ही बालकरण गौड के घर से महुआ की खुशबू आ रही थी जिसके कारण हाथियों का यह दल वहां पहुंच गया और बालकरण के मकान की दीवार तोड़ डाली। 29 सितंबर की सुबह हाथी वापस जंगल लौट गए।

इस पूरे प्रकरण पर वन विभाग ने कहा है कि हाथियों की निगरानी की जा रही है साथ ही गांव से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। गांव वालों से यह भी अपील की गई है कि वे महुआ की शराब ना बनाएं क्योंकि महुआ की खुशबू से हाथी आकर्षित होते हैं।

कोतमा के वन परीक्षेत्र रेंजर परिवेश सिंह भदौरिया का कहना है कि हाथियों की मॉनिटरिंग की जा रही है साथ ही मुनादी पीटकर गांव वालों को सतर्क भी किया जा रहा है। रेंजर का यह भी कहना है कि किसानों को हुए नुकसान का राजस्व विभाग के माध्यम से जायजा भी लिया जा रहा है और जल्द ही उन्हें मुआवजा भी दिलवाया जाएगा। वन विभाग द्वारा जल्द से जल्द ही इन हाथियों को वापस जंगलों में पहुंचाने का इंतजाम किया जाना चाहिए।

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