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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनने के बाद भी नहीं हैं अस्पताल में सुविधाएं, खाली पड़े हैं डॉक्टरों व नर्सों के पद

उमरिया के चंदिया विकासखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत बेहतर नहीं कही जा सकती है। चंदिया सहित पचासों गांव की स्वास्थ सुविधा की आपूर्ति करने वाला यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। अस्पताल में न तो पर्याप्त संख्या में डॉक्टर हैं ना ही स्टाफ। डॉक्टर के यहां पांच पद स्वीकृत है लेकिन केवल दो ही डॉक्टर कार्यरत है।

इसी तरह स्टाफ नर्स के भी एक पद और ड्रेसर के दो पद खाली हैं। तीस बिस्तरों वाला यह समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केवल रेफरल केंद्र बनकर रह गया है। जब भी कोई गंभीर मरीज अस्पताल में आता है तो उसे कटनी उमरिया या शहडोल रेफर कर दिया जाता है।

राज्य सरकार द्वारा चंदिया को मिनी स्मार्ट सिटी का दर्जा दिया गया था लेकिन इस स्मार्ट सिटी के अस्पतालों का क्या हाल है इसका अंदाजा साफ लगाया जा सकता है।

चंदिया विकासखंड में 80 से भी ज्यादा गांव हैं, केवल चंदिया की ही आबादी 25000 पहुंच चुकी है। इतनी बड़ी आबादी को केवल इसी एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का आसरा है।

इसके बाद भी यहां सुविधाओं का अभाव है। हर रोज यहां सैकड़ों की संख्या में मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं और डॉक्टरों के ना होने की वजह से परेशान होते हैं। इसके अलावा अस्पताल में गायनोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिक, मेडिसिन, सर्जन व एनेस्थीसिया के भी पद खाली पड़े हुए हैं।

अस्पताल की अव्यवस्था को देखकर मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों में जाकर इलाज कराना पड़ रहा है। निजी अस्पतालों में डॉक्टर मनमाने तरीके से पैसे वसूल करते हैं और गरीब आदमी परेशान होता है। अस्पताल में केवल डॉक्टरों की कमी हो ऐसी बात नहीं है बल्कि नाइट ड्यूटी, इमरजेंसी, पुलिस केस व प्रसव सेवा में भी काफी परेशानियां देखी जा रही हैं।

उमरिया के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी आरके मेहरा का कहना है कि डॉक्टर की कमी को जल्द ही पूरा किया जाएगा। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है और अस्पताल की अन्य सुविधाओं को भी बहाल किया जा रहा है। अधिकारियों के इसी भरोसे पर जनता संतोष करके बैठ जाती है और उनकी परेशानियां भी बनी रहती हैं। प्रशासन को स्वास्थ्य सुविधाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाने की जरूरत है।

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