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जनजागरूकता अभियान रह गया धरा का धरा, जगह-जगह बारिश का पानी भर जाने से बढ़ा जानलेवा मच्छरों का प्रकोप

लगातार हो रही बारिश के कारण सड़कों में जगह-जगह हुए गड्ढों व नालों में पानी भर जाता है, जिस कारण इस गंदे पानी में मच्छरों की तादाद बढ़ती चली जाती है और स्थानीय लोगों की जानों पर खतरा मंडराने लगता है।आज हम बात कर रहे है बहरई गांव की।

जहां न तो साफ-सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है, न ही कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है। इस कारण से यहां डेंगू और मलेरिया के मच्छर दिन पर दिन तेज़ी से बढ़ते जा रहे है और बीमारियां फैला रहे है।

डेंगू से बचने के लिए कई जन जागरूकता अभियान तो चलाए जाते है किंतु उन पर अमल कोई नहीं करता है। इस कारण से बरघाट विकासखंड के बेहरई गांव समेत आस पास के कई अन्य गांव वासी नहीं जानते की डेंगू से बचाव के उपाय क्या है और कैसे इस बीमारी से लड़ा जा सकता है।

सड़को पर जगह-जगह गड्ढों में पानी भरने के कारण तेज़ी से जानलेवा मच्छरों का प्रकोप बढ़ता चला जा रहा है। दिन में तो फिर भी इन मच्छरों का प्रकोप थोड़ा कम होता है, लेकिन दिन ढ़लते-ढ़लते रात में ये मच्छर लोगों के घरों के आस पास भिनभिनाने लगते है।

डेंगू, चिकनगुनिया के मच्छरों की चार अलग-अलग स्टेज होती हैं, जिन्हें पनपने या मारने के लिए प्रशासन के पास अलग-अलग केमिकल और उपकरण होते है। मच्छर के अंडों को आंखों से देखना बेहद मुश्किल होता हैं, इसलिए लार्वा, प्यूपा और एडल्ट मच्छरों को मारने के लिए केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है।

सबसे ज्यादा जरूरी है इन मच्छरों को पनपने से रोकना, जिसके लिए कूलर या टंकी के पानी में टेमिफोस् ग्रेन्युलस का इस्तेमाल काफी कारगर साबित होता है। साथ ही सभी पानी की टंकियों व कूलरों के पानी को हर 10 से 15 दिन के अंदर साफ कर स्वच्छ पानी भरना चाहिए। डेंगू के मच्छरों के लिए फॉगिंग से भी ज्यादा कारगर वॉल स्प्रेयिंग होती हैं, जिसमे अल्फा सायपर मेथ्रिन का इस्तेमाल होता है, जिसे कैरोसिन में मिलाकर बनाया जाता है और घर की दीवारों पर स्प्रे किया जाता है।

इसका असर 3 महीने तक रहता है और मच्छर दीवार पर बैठते ही उसके संपर्क में आकर मर जाता है। स्वास्थ्य विभाग को इन सब महत्वपूर्ण बातों को लेकर स्थानीय लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।

प्रशासन को इन्ही सब तरीकों को अपना कर जल्द से जल्द इन मच्छरों को मारने के लिए सख्त कदम उठाना चाहिए। साथ ही सड़को पर हुए गड्ढों को बंद किया जाना चाहिए, व गंदे नालों की सफाई भी समय -समय पर करनी चाहिए जिससे इन मच्छरों से होने वाली बीमारियों पर काबू पाया जा सके।

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