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आवास का सपना अब सपना बनके रह गया, तीन वर्ष बीतने पर भी घरों के काम अधूरे

अब यह ख़बर चौंकाती नही है की आवास का सपना दिलाकर ग्रामीणों को बहला फुसला दिया जाता है। इस सपने को पूरा कराने के लिए कई योजनाएं भी बनाई गईं हैं जैसे इंदिरा आवास, मुख्य्मंत्री आवास और फिर प्रधानमंत्री आवास योजना। कुछ का तो नामो निशान नही और पीएम आवास योजना वर्ष 2016-17 में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में लागू की गई, जिसकी सबको आवास दिलाने की मंशा धरी की धरी रह गई।

2022 तक दोनों क्षेत्रों की योजनाओं को पूरा करने के आदेश से पारित यह योजना, 25 हजार से अधिक गरीब परिवार का आवास का सपना आज तक पूरा नही कर पाई है। सूची में नाम न होने के बावजूद शहडोल शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ हितग्राही चिन्हित भी किए जा चुके हैं जिनका नाम भी सर्वे के बाद जोड़ा गया है।

2011 में हुई जनगणना के मुताबिक योजना लाभार्तीयों का चयन किया गया था जिसमे 1 लाख़ 5 हजार 720 से अधिक लोगों का आवास बनना था। इसके बावजूद 68,133 हितग्राहियों को ही तीसरी किश्त प्राप्त हुई है। स्पेशल बैगा प्रोजेक्ट में 5,700 आवास भी मंजूर हुए लेकिन अब तक केवल 60 ही पूरे हुए हैं। और जिनका आवास स्वीकृत भी कर लिया गया है वो भी काम अभी पूरा नही हो पाया है। वार्ड क्रमांक 30 की महील जिनके पति राजेंद्र बैगा विकलांग हैं वो बतातीं हैं की कई बार इस पर कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाई गई लेकिन आज तक यह काम अधूरा का अधूरा पड़ा है।

अब आवास न मिलने के कई कारण जो सामने निकल कर के आते हैं जिनमे सिस्टम का भ्रष्टाचार, सरपंच सचिव की मिलीभगत और लोहा के दामों में बढ़ोतरी जिस कारण वश किस्त मिलने के बावजूद काम पूरा नही हो पा रहा है।

जब मुख्य नपाधिकारी शहडोल अमित तिवारी से इसके चलते पूछा गया तो उन्होंने कहा की बजट के चलते कई बार किश्ते समय पर जारी नही हो पाती है, लेकिन अब व्यवस्था में खासा सुधार हो चुका है, सभी लाभार्थियों को आवास की सुविधा मिलेगी।

अब देखने वाली बात यह होगी की कब तक भेजा गया यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, और उम्मीद यही होगी की हर बार की तरह प्रशासन ग्रामीणों को न केवल सपने दिखाए बल्कि उन पर अमल करने का भी प्रयास करे।

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