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9 हज़ार ग्रामीणों को अब तक नहीं मिला आवास, पंचायत ने कोरोना काल को बताया देरी के पीछे का कारण

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकार ने देश के गरीबों को सर पर एक छत प्रदान कराने का लक्ष्य रखा था, जिसके लिए अब तक सरकार द्वारा 6 करोड़ से भी अधिक राशि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगाई जा चुकी है। किंतु अभी तक 9 हज़ार से अधिक लोगों को अपने आवास के निर्माण का इंतज़ार है।

विभागीय जानकारी के अनुसार साल 2016-17 से 2021 में साल की शुरूआत के दौरान 52,279 गरीबों को आवास का लक्ष्य था। जिस में करीब 40 हजार लोगों के आवास पूर्ण हो चुके हैं और करीब 9200 के कार्य किश्त के इंतजार में अटके हैं।वहीं शहरी क्षेत्र के लक्ष्य में कुल 6134 पात्र पाए गए लोगों में से अभी तक सिर्फ 986 के मकान ही बन पाए हैं। जबकि 3206 अभी भी बनने बाकी है। इसके पीछे का कारण कोविड काल बताया जा रहा है।

उमरिया जिले में अब तक सबसे ज़्यादा आवास करकेली जनपद क्षेत्र में प्रदान किये गए है। किंतु ये आवास पहली किश्त के बाद खड़े तो कर दिए गए है पर अब तक कई हितग्राहियों को अपनी दूसरी किश्त आने का इंतज़ार है, क्योंकि उसके बाद ही इन आवासों का निर्माण कार्य पूरा हो सकेगा।

ग्रामीण वासियों ने किश्त में इस देरी का कारण सरपंच सचिवों द्वारा अडंगेबाजी को बताया है, जिस कारण हितग्राहियों को रोज़ाना पंचायत के चक्कर काटने पड़ रहे है और उन्हें इस कारण बहुत परेशानियां उठानी पड़ रही है।

वही जिला पंचायत में आवास योजना प्रभारी आरएन चंदेले का कहना है कोरोना के कारण किश्त में देरी हो रही है, जिससे कई आवासों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। इस कार्य को पूरा करने के लिए जल्द ही पंचायतों के साथ एक समीक्षा बैठक की जायगी। सीईओ द्वारा जारी निर्देश में बचे हुए 9 हज़ार हितग्राहियों की दूसरी किश्त जल्द ही जारी कर निर्माण कार्य पूरा किया जायगा।

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