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स्कूलों में लगाए गए सोलर पैनल बन चुके हैं कबाड़, 3 वर्ष बाद भी नहीं शुरू हुआ बिजली उत्पादन

शहडोल में बिजली के क्षेत्र में स्कूलों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 80 से भी ज्यादा स्कूलों की छतों पर सोलर पैनल लगाए गए थे जिनकी लागत करोड़ों रुपए आई थी, लेकिन 3 वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक इन सोलर पैनल से बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो सका है, बल्कि दूसरी ओर कई समस्याएं सामने आ रही हैं।

कई स्कूलों से शिकायत आई है कि अनेक सोलर पैनल चोरी हो चुके हैं और प्रशासन की अनदेखी से कई पैनलों में जंग लग चुकी है। यहां तक कि छत के ऊपर जो पैनल लगाए गए थे उसके कारण स्कूल की छत भी खराब हो चुकी है और बरसात में कक्षाओं के अंदर पानी टपकता है। यही नहीं बल्कि स्कूलों को बकाया बिजली बिल भी चुकाना पड़ रहा है।

2018 से 2019 के बीच शहडोल के 80 स्कूलों में सोलर पैनल लगाए गए थे इनमें से ज्यादातर हायर सेकेंडरी, सेकेंडरी और मॉडल स्कूल थे। इनका उद्देश्य बिजली उत्पादन करना था ताकि स्कूल को बिजली का बिल ना चुकाना पड़े। लेकिन स्कूल प्रशासन का कहना है कि सोलर पैनल के संचालन के लिए बिजली का लोड पर्याप्त नहीं है। यहां पर लगाए गए सोलर पैनल 5 किलो वाट और 10 किलोवाट के हैं जबकि बिजली का लोड केवल एक से 3 वाट ही उपलब्ध है।

जानकारी है कि 5 किलो वाट के एक सोलर पैनल की लागत डेढ़ लाख रुपए और 10 किलो वाट के सोलर पैनल की लागत तीन लाख रुपए थी। इतनी भारी-भरकम राशि फिलहाल प्रशासन की अनदेखी से बर्बाद हो रही है। प्रशासन की इस तरह के रवैए को देखकर स्कूलों के लोग भी अब यह कहने लगे हैं कि जब इन सोलर पैनल्स को शुरू ही नहीं करना था तो यह लगवाए ही क्यों गए थे। स्कूलों को अभी भी भारी भरकम बिजली बिल चुकाना पड़ रहा है।

ऊर्जा विकास निगम के अधिकारी कई बार इस संबंध में पत्र लिख चुके हैं लेकिन बिजली कंपनी के अधिकारी कोई कार्यवाही करने के लिए तैयार नहीं। सालों से लगे सोलर पैनल खराब भी होने लगे हैं। पचगांव के स्कूल की छत में लगे दो सोलर पैनल तो चोरी भी हो चुके हैं।

ऊर्जा विकास निगम अधिकारी रितेश शुक्ला का कहना है कि जिले के दो तीन स्कूलों में सोलर पैनल शुरू हो चुके हैं। बिजली का लोड कम होने की वजह से इन्हें चालू करने में दिक्कत हो रही है लेकिन इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही बिजली का लोड बढ़ते ही नेट मीटर लगाते हुए संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

स्कूल प्रशासन भी पिछले 3 साल से इसी प्रकार के आश्वासन और भाषण सुन रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है और सरकार का करोड़ों रुपया बर्बाद हो रहा है। प्रशासन से जल्द से जल्द इस संबंध में कार्यवाही की दरकार है।

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