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सड़क किनारे हुए अतिक्रमण पर प्रशासन ने चलाया बुलडोजर

उमरिया जिले के एसईसीएल की कालोनियों के पास मुख्य सड़क के किनारे हुए अतिक्रमण पर प्रशासन ने मंगलवार को बुलडोजर चलवा दिया। दोपहर हुई इस कार्यवाही में लगभग 25 कब्जेदारी चिन्हित किए गए थे जिनके मकानों, गौशालाओं और दुकानों पर यह कार्रवाई की गई है।

इस मौके पर उमरिया जिले के कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव, बांधवगढ़ के तहसीलदार दिलीप सिंह, नज़ूल की तहसीलदार कोमल रैकवार सहित अन्य अधिकारीगण भी मौजूद थे। प्रशासन ने पुलिस की मदद से एक-एक कर सभी ढांचों को नष्ट कर दिया। इस कार्यवाही के लिए नगर पालिका ने जेसीबी, ट्रेक्टर सहित अन्य सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए थे।

प्रशासन का मानना है कि इन अतिक्रमणकारियों ने अवैध रूप से सड़क के किनारे अस्थाई ढांचे तैयार कर लिए थे। सड़क के सगरा चौराहे से लेकर लगभग 100 मीटर की लंबाई में बने अस्थाई ढांचे को प्रशासन ने गिरवा दिया। इस कार्यवाही में उमरिया कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने खुद मकानों में जाकर स्थिति का जायजा लिया और लोगों के सामान को बाहर निकलवाया। साथ ही यह भी आदेश दिया है कि 25 अक्टूबर को यह अभियान दोबारा चलाया जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि सड़क किनारे हुए इस अवैध अतिक्रमण को लेकर पिछले 2 साल से नोटिस दिया जा रहा था, लेकिन कब्जेधारी यहां से हटने को तैयार नहीं थे। इस कारण यह कार्यवाही करनी पड़ी। जबकि कुछ लोगों का मानना है कि प्रशासन ने कांग्रेसी विचारधारा से जुड़े हुए लोगों को ही चिन्हित कर उनकी दुकानों और मकानों को गिराया है।

इस पर उमरिया जिले के कांग्रेस अध्यक्ष राजेश शर्मा का कहना है कि प्रशासन ने जल्दबाजी से काम लिया है और लोगों को अपना सामान निकालने का भी मौका नहीं दिया। अस्थाई मकानों में रह रहे लोगों ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई नोटिस नहीं दिया गया था और प्रशासन द्वारा नोटिस दिए जाने के बात एकदम भ्रामक है।

जो भी हो लेकिन सच्चाई यह है कि 25 से 30 लोग जो इस सड़क किनारे किसी तरह अपनी जीविका चला रहे थे वे बेघर कर दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से अब इनके रहने और रोजगार मुहैया कराने का भी कोई प्रबंध नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में यह लोग किस तरह अपने परिवार का पालन पोषण कर पाएंगे? प्रशासन को चाहिए कि जब इस तरह की कार्यवाहियां की जाती हैं तब यहां रह रहे लोगों की जीविका से संबंधित वैकल्पिक व्यवस्था का इंतजाम पहले से किया जाना चाहिए।

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