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गरीबों के राशन आवंटन में की जा रही गड़बड़ी

सार्वजनिक वितरण प्रणाली और कोरोना महामारी के चलते राशन कार्ड धारियों को बांटे जाने वाले अनाज और राशन में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जानकारी है कि शासकीय दुकानदारों द्वारा गरीबों को बांटे जाने वाले राशन में हेरफेर किया जा रहा है और उन्हें कम अनाज दिया जा रहा है। जबकि शासकीय दुकानदार कालाबाजारी और मुनाफाखोरी में लगे हुए हैं।

करोना काल में लोगों को पर्याप्त मात्रा में राशन मिल सके इसलिए केंद्र सरकार द्वारा नवंबर माह तक 10 किलो अनाज देने का फैसला किया गया था। जिसमें से 5 किलो अनाज मुफ्त और 5 किलो का भुगतान किया जाना था। लेकिन शिकायतें मिली है कि शासकीय राशन दुकानदारों द्वारा केवल 5 किलो राशन ही आवंटित किया जा रहा है। पिछले 6 माह से राशन कार्ड धारियों को पर्याप्त मात्रा में राशन नहीं मिल पा रहा है।

इसी को लेकर ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के सरपंच संजय लकड़ा के पास शिकायत भेजी थी। सरपंच ने बताया कि इस मामले पर खाद्य अधिकारी एवं फूड इंस्पेक्टर को कई बार लिखित शिकायत दी गयी है और उत्तर में उन्हें कार्यवाही किए जाने का भरोसा दिया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी तक इस विषय में कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि जहां शासकीय दुकानदारों द्वारा 10 किलो की जगह 5 किलो अनाज ही दिया जा रहा है वही तौल में भी गड़बड़ी करके मुनाफाखोरी की जा रही है। बुढार जनपद पंचायत के गोडिन बुढा गांव में भी ऐसी समस्या बनी हुई है। लोगों ने बताया कि ग्राम पंचायत में लगभग 415 कार्ड धारी हैं जिन्हें अप्रैल माह से केवल आधा ही राशन दिया जा रहा है। केरोसिन का आवंटन तो पिछले कई सालों से नहीं किया गया है। प्रशासन के इस रवैये से ग्रामीण खासे नाराज हैं और प्रशासन से जल्द से जल्द कार्यवाही किए जाने की मांग कर रहे हैं।

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