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भ्रष्टाचार की जांच करने आए ऑडिटर ने सरपंच और सचिव पर लगाया सहयोग न करने का आरोप

उमरिया जिले के मानपुर जनपद के नौगमा गांव के सरपंच और सचिव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। इसी की जांच करने पहुंचे ऑडिटर ने बताया कि गांव के सरपंच और सचिव जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत सचिव और सरपंच द्वारा लाखों रुपए का गबन किया गया है। इन दोनों की मिलीभगत से कई योजनाएं केवल कागजों चल रही है और उनका पैसा खाया जा रहा है।

पूरे मामले की जांच करने पहुंचे ऑडिटर पंकज पटेल ने बताया कि वे 15 दिनों से प्रयास कर रहे हैं लेकिन पंचायत सरपंच श्रीमती बबीता पटेल और सचिव प्रेमदास सिंह जांच में कोई सहयोग नहीं कर रहे हैं। जबकि सरपंच और सचिव का मानना है कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।

जब गांव वालों से इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने भी भ्रष्टाचार के आरोपों का अनुमोदन किया है और कहा है कि यदि सरपंच और सचिव ने कोई भी गलत काम नहीं किया है तो उन्हें ऑडिटर की जांच में सहयोग देना चाहिए। ग्राम पंचायत सरपंच और सचिव पर कई तरह के आरोप लग रहे हैं।

जानकारी है कि ग्राम पंचायत द्वारा महुआर टोला में 10 से 15 लाख की लागत से बने खेल मैदान और स्टॉप डैम में घोटाला किया गया है। जहां इनकी लागत 15 लाख दिखाई गई है वहां जमीनी तौर पर दो लाख का भी काम नहीं हुआ है। इसी तरह तालाब, मेढ़बंधन, कपिलधारा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरपंच, सचिव द्वारा जमकर घोटाला किया गया है।

ग्राम पंचायत के मस्टर रोल में ऐसे कई फर्जी खाताधारक हैं जिन्होंने एक भी काम नहीं किया है, उनके खाते में आए पैसे सरपंच व सचिव द्वारा हड़पे जा रहे हैं। पंचायत द्वारा बनाए गए शौचालय, सड़कों की स्थिति इतनी दयनीय है कि ये इस्तेमाल करने लायक भी नहीं बचे हैं। ग्राम पंचायत द्वारा ग्राम सेहरा में भी 35 मीटर सीसी रोड बनाई गई थी जिसकी लागत 15 लाख रुपए दिखाई गई है, इसी तरह तीन स्टॉप डेम जिनकी लागत 30 लाख रूपए दिखाई गई है, इनका जमीनी स्तर पर काम पांच लाख का भी नहीं है। घोटालों को लेकर ग्रामीणों ने जिला स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की थी।

इस पूरे मामले पर उमरिया जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती इला तिवारी का कहना है कि ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। देखना होगा कि अधिकारियों के ये बयान कितनी सच्चाई रखते हैं और कब तक भ्रष्टाचार के इस खेल से पर्दा उठ पाता है।

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