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किसानों को नहीं मिला अधिग्रहित जमीन का मुआवजा व रोजगार, अब अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने का किया फैसला

एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र के ग्रामवासियों ने जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन। मामला दामिनी कोयला खदान का है जहां किसानों की भूमियों का अधिग्रहण कर कालरी प्रबंधन ने खदान तो खोल दी किन्तु जमींदारों को उचित मुआवजा अब तक नहीं दिया गया। दामिनी अंडरग्राउंड खदान की शुरूआत साल 2003-04 में हुई थी। फिर कालरी प्रबंधन द्वारा साल 2010-11 में गांव खैरहा और कदाँहा के किसानों की भूमि अधिग्रहित करते हुए किसानों को जमीन का मुआवजा तो दे दिया गया किन्तु रोजगार, अधिग्रहण के 10 साल बीत जाने के बाद भी आज तक जमींदारों को नहीं दिया गया।

इसके बाद डीआरसीसी की बैठक भी की गई थी जिसमें लगभग 219 पात्र किसानों को 6-8 महीने के अंदर नौकरी दिए जाने की सिफ़ारिश दी गई थी किंतु अभी तक ऐसा नहीं किया गया। नौकरी की आस में बैठे किसानों ने बताया कि कालरी प्रबंधन ने उनकी ज़मीन का अधिग्रहण कर अरबों-खरबों का कोयला निकाला है पर अब तक उनको रोजगार प्रदान नहीं किया है। जिस वजह से वे और उनके बच्चे नौकरी की आस में बैठे है और इससे उनका भविष्य सकंट में आ गया है।

जब इस बारे में किसानों ने कालरी प्रबंधन से शिकायत की तो उन्होंने कोई न कोई बहाना बनाकर इस बात से अपना पीछा छुड़ा लिया। वैसे तो खदान से लगभग कोयला निकाला जा चुका है किन्तु 2 से 3 सालों का काम अभी भी बचा हुआ है। पर कालरी प्रबंधन अब कह रहा है कि अब किसान लोगों को नौकरी नहीं मिल सकती है। इस खबर के बाद ही किसानों द्वारा जमीन के दूसरे मुआवजे व नौकरी हेतु विभिन्न स्तरों पर आवेदन और शिकायतें की गई है किन्तु कहीं भी सुनवाई नहीं हुई।

किसानों के साथ हुए धोखे और उनके द्वारा मुआवजे और रोजगार प्रदान कराने के सभी प्रयास असफल रहने के बाद अब किसानों के संगठन ने दामिनी खदान के मुख्य द्वार पर 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने का फैसला किया है।

उम्मीद है प्रशासन द्वारा इस मामले में सख्त कार्यवाही की जायगी और इन किसानों को न्याय मिल सकेगा।

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