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पीडीएस दुकानों के नियमित रूप से न खुलने के कारण पात्र ग्राहकों को नहीं मिल रहा समय पर राशन

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत पात्र राशन कार्ड धारियों को उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से कम कीमत पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन जिले की उचित मूल्य दुकानों का हाल यह है कि आधे से ज्यादा दुकानों पर ताला लटका रहता है कई दुकानें हफ्ते में दो चार दिन ही खुलती हैं। इस कारण पात्र लोगों को समय पर राशन नहीं मिल पाता है।

स्थिति को देखते हुए जिला आपूर्ति नियंत्रक ने सभी उचित मूल्य दुकान संचालकों को पत्र जारी कर निर्देश दिए थे, इसके बावजूद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। नियमों के अनुसार महीने में कम से कम 15 दिन दुकान खोलने का प्रावधान है, लेकिन जिले की अधिकांश दुकानें ऐसी हैं, जो खुलती ही नहीं हैं। अक्टूबर माह की बात करें तो जिले की कुल 448 में से 232 दुकाने दो से चार दिन, वहीं 195 दुकानें 8 से 10 दिन खुल रही।

ग्रामीण इलाकों की उचित मूल्य दुकानों का तो और भी बुरा हाल है। 14 अक्टूबर को पूर्ति नियंत्रक द्वारा पत्र जारी कर शासकीय दुकानों को निर्देश दिए गए थे लेकिन जब स्थिति का जायजा लिया गया तो सोमवार, 18 अक्टूबर को जिले की 245 पीडीएस दुकान बंद पाई गईं। शहडोल नगर पालिका की बात करें तो यहां 18 में से 11 दुकानें बंद रही।

गड़बड़ी केवल दुकानों के खुलने या बंद रहने की ही नहीं है बल्कि पैसे लेकर पात्र लोगों को राशन देने, घटिया क्वालिटी का राशन वितरण करने, समय पर राशन ना देने संबंधित कई शिकायतें भी सामने आई है।

जबकि शासन द्वारा इन उचित मूल्य की दुकानों को प्रतिमाह मानदेय और कमीशन भी मिलता है, इसके बावजूद भी दुकान संचालकों द्वारा की जा रही लापरवाही में कमी नहीं आती है। ग्रामीण क्षेत्र में उचित मूल्य की दुकान संचालन करने वाली संस्था को प्रतिमाह 8400 रुपए और नगरी क्षेत्र में दुकान संचालन करने पर 70 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से कमीशन दिया जाता है।

जिला आपूर्ति नियंत्रक द्वारा दुकान संचालकों को लिखे गए पत्र में दुकान संचालन में हो रही गड़बड़ी और दुकान खोलने के विषय पर निर्देश दिए गए और उन्हें माह में 11 से 30 दिन तक दुकान खोल कर राशन वितरण करने का भी आदेश दिया गया।

जिला आपूर्ति नियंत्रक ने यह भी कहा है कि यदि दुकान संचालकों द्वारा नियम का पालन नहीं किया जाता है तो नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। देखना होगा कि आपूर्ति नियंत्रक के इस फैसले से स्थिति में कितना बदलाव आता है!

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