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राजस्व आंकड़ों के अपडेट ना होने से हो रही गड़बड़ी, सेवा प्रदाताओं द्वारा की गई 40 लाख की हेरा फेरी

राजस्व विभाग के अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा एक बार फिर सामने आया है। राजस्व विभाग के आंकड़ों के अपडेट ना होने की वजह से सेवा प्रदाताओं द्वारा लाखों रुपए की हेराफेरी की जा रही है। जमीन की खरीद बिक्री, सीमांकन, नामांतरण आदि के दस्तावेजों की यथास्थिति को छुपाकर सेवा प्रदाताओं द्वारा रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।

जानकारी है कि सेवा प्रदाताओं द्वारा दूरदराज के इलाकों में ऐसी गतिविधियां की जा रही हैं जहां अधिकारी जांच पड़ताल के लिए कम ही आते हैं। इन सेवा प्रदाताओं द्वारा दस्तावेजों में आधी अधूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है और रजिस्ट्री कराने के प्रयास किए जाते हैैं। इस पूरी गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ जब पंजीयक विभाग द्वारा दूरदराज के इलाकों में मुआयना किया गया और दस्तावेजों की पड़ताल की गई। जांच के बाद उप पंजीयक द्वारा प्रकरण तैयार कर लिया गया है और कार्यवाही के लिए सिफारिश भेज दी गई है।

उप पंजीयक द्वारा जब ग्रामीण इलाकों में दस्तावेजों और स्थल का मुआयना किया गया है तो पिछले 1 माह में ही 16 प्रकरण सामने आए हैं जहां सेवा प्रदाताओं द्वारा तथ्यों को छुपाकर और तोड़ मरोड़ कर लगभग 40 लाख 15 हजार 901 की हेराफेरी की गई है। इसमें से 3420818 रुपए स्टांप ड्यूटी और 595083 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस के संबंध में गड़बड़ी पाई गई है।

इस गड़बड़ी का मुख्य कारण राजस्व आंकड़ों का अपडेट ना होना बताया जा रहा है। समय पर राजस्व आंकड़े अपडेट ना होने की वजह से भूमि में जो बदलाव हुए हैं उनका आंकड़ा दर्ज नहीं किया जाता है और पुराने आंकड़ों के आधार पर ही नई रिपोर्ट तैयार कर सेवा प्रदाता द्वारा गड़बड़ियां की जाती हैं। असली जानकारी एजेंटों द्वारा छुपा ली जाती है और रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी का कम आकलन होता है।

गड़बड़ी का एक मामला बाईपास रोड से लगी हुई भूमि के दस्तावेज में भी देखा गया है, जहां भूमि मुख्य मार्ग से 100 मीटर के दायरे में बताई गई थी लेकिन जब स्थल पर जाकर मुआयना किया गया तो दूरी काफी ज्यादा थी। इसी तरह जयसिंह नगर तहसील के तहत कुबरा ग्राम में भी कोल्ड स्टोरेज निर्माण के लिए 10 वर्ष की लीज पर ली गई भूमि के संबंध में गड़बड़ी पाई गई है। गड़बड़ी का मामला पावर ऑफ अटॉर्नी से संबंधित दस्तावेज में भी देखने को मिला है। इस तरह सितंबर माह में कुल 16 प्रकरण दर्ज किए गए हैं और सेवा प्रदाताओं के खिलाफ कार्यवाही करने की सिफारिश भी भेज दी गई है।

लेकिन अभी भी सवाल अधिकारियों पर ही उठ रहा है कि समय पर राजस्व आंकड़ों को अपडेट क्यों नहीं किया जाता है? और ना ही अधिकारियों द्वारा इलाके का मुआयना करके जांच की जाती है। उम्मीद है इस गड़बड़ी से राजस्व विभाग कुछ सबक लेगा और यथा स्थिति में बदलाव हो सकेगा।

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