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सिंदूरी भर्री और खितौली में चार बच्चे गंभीर कुपोषित, NRC में होंगे भर्ती

सरकार द्वारा कुपोषित बच्चों के पोषण और अच्छे स्वास्थ्य के लिए कई योजनाएं शुरू की जाती है और देशभर में कई एनआरसी यानि कि न्यूट्रिशनल रेहाबिलेशन सेंटर खोलने के बावजूद आज भी देश के कई राज्यों और जिलों में भारी मात्रा में कुपोषण से ग्रस्त बच्चें पाए जाते है। आज हम बात कर रहे है शहडोल जिले के जनपद पंचायत सोहागपुर के गांव सिंदूरी भर्री और खितौली की।

हाल ही में जिला कलेक्टर वंदना वैद्य इन दोनों गांव में भ्रमण करने हेतु गई थी। यहां पहुंचने पर जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग ने कलेक्टर को बताया कि गांव सिंदूरी भर्री और खितौली के बैगा परिवारों में चार गंभीर कुपोषित बच्चे है, जिनके परिवार वाले उन्हें एनआरसी में भर्ती कराने के लिए तैयार नहीं है।

इसके बाद जिला कलेक्टर ने तुरंत ही इन सभी बैगा परिवारों के सदस्यों से इस बारे में बात कर इन कुपोषित बच्चों की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने इन सभी परिवारों के लोगों को बच्चों को तुरंत एनआरसी में भर्ती करने को कहा, और ऐसे कुपोषित बच्चों के लिए ही बनाए गए न्यूट्रिशनल रेहाबिलेशन सेंटर के महत्व के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य की ज़िम्मेदारी इनके परिजनों की ही है। सरकार द्वारा इतनी सारी योजनाओं और न्यूट्रिशनल सेंटर्स का उद्देश्य ही इन कुपोषित बच्चों को आहार, दवाईयां व खेल -कूद और व्यायाम के तरीके आदि प्रदान करना है। जिसका लाभ इन कुपोषित बच्चों के परिवारों को लेना ही चाहिए।

कलेक्टर ने गांव के सभी लोगों को पोषण किट भी बांटी और उसके महत्व के बारे में भी बताया। और कहा कि ये पोषण किट बच्चों को दो टाइम देना ज़रूरी है जिससे बच्चे ताकतवर और फिट बन सके। साथ ही कलेक्टर ने कुपोषण के रोकथाम के लिए भी गांववासियों को कई उपचार बताये। जैसे कि बच्चे को प्रोटीन का सेवन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पोषक तत्वों वाला आहार दिया जा सकता है। हरी-सब्ज़ियों और फलों का इस्तेमाल करना भी बेहद ज़रूरी हो जाता है।

गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को बड़ी सावधानी से दूध पिलाने और उनका पुन: पोषण करने की आवश्यकता होती है, इसलिए उन्हें सीधे आहार नहीं दिया जा सकता है। एक बार जब उनकी स्थिति स्थिर हो जाती है, तो उन्हें धीरे-धीरे एक सामान्य आहार से परिचित कराया जा सकता है। जिसके लिए उन्हें एनआरसी में भर्ती कराना बेहद ज़रूरी है।

जिला कलेक्टर की इन सभी बातों पर गौर करते हुए आखिरकार गांववासी अपने कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराने को तैयार हो गए और कलेक्टर को आश्वासन भी दिया कि जल्द से जल्द वे अपने बच्चों को एनआरसी में भर्ती करा देंगे।

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