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शुरू हो चुके हैं स्कूल लेकिन शिक्षकों की नहीं हुई है नियुक्तियां, सैकड़ों पद हैं खाली

कोरोना लॉकडाउन के कारण लंबे समय बाद स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को खोला गया था और शिक्षा व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के प्रयास शुरू हुए थे, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में अभी भी सुधार नहीं हो पा रहा है। कारण यह है कि स्कूलों में बड़ी संख्या में प्राचार्य, व्याख्याता, शिक्षक और प्रधानाध्यापक के पद खाली पड़े हुए। जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों में आधे से ज्यादा पद खाली हैं।

लाखों करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद प्रशासन ने स्कूल, हॉस्टल, मैदान व अन्य शिक्षा व्यवस्था तो उपलब्ध करा दी है लेकिन सबसे प्रमुख शिक्षकों के नियुक्ति पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। शिक्षकों की नियुक्ति न हो पाने की वजह से जहां एक और स्कूल संचालन में बाधा आ रही है वही बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। इससे बच्चों के परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहे हैं।

जिले के स्कूलों में प्राथमिक, माध्यमिक और हाई स्कूल के प्राचार्य, व्याख्याता, प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के पदों की बात करें तो कुल 6234 पद स्वीकृत हैं लेकिन वर्तमान आंकड़ों के अनुसार केवल 3572 पद ही भरे हुए हैं। जबकि इनमें से 2662 पद अभी भी खाली हैं। इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली होने से जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं वहां दूसरे शिक्षकों को अटैच किया जा रहा है और कहीं-कहीं तो स्कूल बगैर शिक्षकों के ही संचालित हो रहे हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई किस तरह होती होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

शिक्षक वर्ग में सबसे ज्यादा माध्यमिक शिक्षक और अध्यापक के पद खाली हैं। इस श्रेणी के 1823 पदों में से केवल 584 पदों पर ही नियुक्तियां की गई हैं, जबकि व्याख्याता के 205 पदों में से केवल 39 पद ही भरे हुए हैं। उच्च श्रेणी शिक्षक की बात करें तो 414 में से 117 भरे हुए हैं और शिक्षक वर्ग 1 के 511 पदों में से 212 पद भरे हुए और शेष खाली हैं।

समस्या केवल शिक्षकों की नियुक्ति की ही नहीं है बल्कि शिक्षकों के ट्रांसफर, वेतनमान आदि को लेकर भी शिक्षक वर्ग में असंतोष है। शिक्षकों की शिकायत है कि उनसे पढाने की जगह उन्हें दूसरे कार्यालय कामों में फंसा दिया जाता है और अटैचमेंट के जरिए एक्स्ट्रा क्लास लगाई जाती है। वही वह शिक्षक जो दूसरे जिलों से ट्रांसफर होकर आए हैं उन्हें अभी तक अलाट नहीं किया गया है। शिक्षा विभाग को जल्द से जल्द शिक्षक वर्ग की इन नीतियों और शिकायतों से संबंधित समस्याओं को जल्द से जल्द हल किए जाने की आवश्यकता है।

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