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जीएसटी के नाम पर भी पंचायतकर्मियों द्वारा नकली फर्म बनाकर किया जा रहा फर्जीवाड़ा

फर्जीवाड़ा अब शहडोल ज़िले में आम सी बात होती हुई नज़र आने लगी है। झूठे आश्वासन देने में एक दम कारगार साबित होती हुई नज़र आने लगी है प्रशासन। लोगों को ये बेहला फुसला दिया की जीएसटी लागू हो जाने के बाद किसी भी प्रकार के फर्ज़ीवाड़े पंचायतों में नहीं होंगे, लेकिन सचाई क्या है, ग्रामीणों द्वारा बताई जा सकती है। आलम यह है की जीएसटी लागू होजाने के बाद सुरक्षात्मक ठगी की जा रही है।

पंचायत के सरपंच के साथ साथ, सचिव, रोजगार सहायकों सहित जनपद में बैठे जिम्मेदारों ने खुद या उनके परिजनों के नाम से जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना शुरू कर दिया है। अब ऐसी फ़र्ज़ी फर्मे जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं है उनके द्वारा पंचायत में मनमाने दामों में सप्लाई कर सरकार को चूना लगाया जा रहा है।

गौर करने वाली बात ये है की जीएसटी नंबर लेने के बाद उक्त फर्मों ने जीएसटीफर्जीवाड़ा अब शहडोल ज़िले में आम सी बात होती हुई नज़र आने लगी है। झूठे आश्वासन देने में एक दम कारगार साबित होती हुई नज़र आने लगी है प्रशासन।

लोगों को ये बेहला फुसला दिया की जीएसटी लागू होजाने के बाद किसी भी प्रकार के फर्ज़ीवाड़े पंचायतों में नहीं होंगे, लेकिन सचाई क्या है, ग्रामीणों द्वारा बताई जा सकती है। आलम यह है की जीएसटी लागू होजाने के बाद सुरक्षात्मक ठगी की जा रही है। पंचायत के सरपंच के साथ साथ, सचिव, रोजगार सहायकों सहित जनपद में बैठे जिम्मेदार खुद या उनके परिजनों के नाम से जीएसटी नियमों का पालन नहीं कर रहे जिसके चलते वाणीज्या कर विभाग द्वारा इनका रजिस्ट्रेशन कैंसिल हो गया लेकिन तब भी उक्त फर्मों द्वारा पंचायतों में जमकर सामग्री की सप्लाई की जा रही है।

ये सामग्री कोई एक ही नहीं हैं बल्कि कई प्रकार की सामग्री है, पंचायतों में कई सप्लायर तो ऐसे भी हैं जिनका टर्न-ओवर बिना किसी खरीदी के सिर्फ बिक्री में ही प्रतिमाह लाखों को छू रहा है, आश्चर्यजनक तो ये बात है। लेकिन जनपद पंचायत जयसिंहनगर में कई ग्राम पंचायतों में लाखों की सप्लाई मेसर्स चतुर्वेदी ट्रेडर्स द्वारा की जा रही है। अब पूछने और सोचने वाली बात यह भी है की ज़मीन पर युक्त फर्म कहाँ संचालित हो रही हैं, यह चाचा भतीजे के अलावा जिन ग्राम पंचायतों के बिल लगे हैं उन्हें ही इसकी खबर है।

अब यह खबर चौंकाती नहीं है की किसी ने किसी पर दबाव डाल कर काम करवाया ऐसी ही खबर जहाँ उक्त फर्म रजिस्ट्रेशन आशीष चतुर्वेदी, वार्ड क्रमांक 13 जयसिंहनगर के नाम पर 17 जनवरी 2018 को किया गया था, लेकिन उक्त फर्म के संचालक ने पंचायतों में दबाव बनवाकर 17 जुलाई 2021 तक 91 बिल पर भुक्तं लिया है।

मज़े की बात तो यह है की जयसिंहनगर जनपद में वाणीज्य कर विभाग ने ऐसी फर्म का रजिस्ट्रेशन किया है, जिसने अपनी जनपद छोड़ संभाग के अंतिम छोर की जनपद पुष्पराजगढ़ जनपद की अंतिम ग्राम पंचायतों तक में सप्लाई करने का बेड़ा उठा लिया। इन कार्यों से यह समझ पाना कोई गलत नहीं है की उक्त संचालक के भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी पुरानी है की अगर ढूंढ़ना शुरू कर दिया गया तो जयसिंहनगर के साथ साथ पुष्पराजगढ़ जनपद के कई ग्राम पंचायतों के जिम्मेदार नपते नज़र आएंगे।

प्रशासन का रवैया हमेशा की ही तरह रहा है, सीईओ जनपद पंचायत कहते हैं की मामले की जांच चल रही है, जांच रिपोर्ट आते ही विधिपूर्वक कार्यवाही की जायेगी।

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