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सोन नदी के किनारे हो रहा भारी मात्रा में खनन, कार्यवाहियों का नहीं हो रहा कोई असर

शहडोल जिले में खनन से प्रतिबंध हटते ही एक बार फिर से खनन कारोबारियों ने भारी मात्रा में खनन शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि बारिश के माह में खनन कार्य बंद कर दिया गया था। लेकिन अब बारिश का मौसम बीत जाने के बाद एक बार फिर धड़ल्ले से खनन कारोबारी नदियों में उतरकर हैवी मशीनों के साथ खनन में जुट गए हैं।

शहडोल और उमरिया के बीच में स्थित मझौली खदान में खनन कारोबारियों ने रेत के खनन के लिए नदी के बीच स्थित टापुओं में ही खनन कार्य शुरू कर दिया है। हालत यह है कि रात के अंधेरे में एक की जगह दो-तीन पोकलेन उतारकर धड़ल्ले से खनन किया जा रहा है। सोन नदी के बीच धार में भी पोकलेन उतारकर रेत निकाली जा रही है।

स्थानीय नागरिक बताते हैं कि रात में खनन का यह कार्य दुगनी और चौगुनी गति से होने लगता है। रात को खनन कारोबारी ज्यादा हैवी मशीन और पोकलेन लगाकर खनन करते हैं और रात को ही बड़े बड़े वाहनों से यह रेत शहडोल व अन्य जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी सप्लाई कर दी जाती है। इस तरह बड़े पैमाने पर हो रहे खनन को लेकर कई बार स्थानीय लोगों द्वारा शिकायतें की गई हैं।

ऐसा भी नहीं है कि अधिकारियों को इस विषय में कोई जानकारी न हो लेकिन अधिकारियों और खनन माफियाओं की मिलीभगत से पर्यावरण को यह नुकसान पहुंचाया जा रहा है। बड़ी भारी मात्रा में खनन करके नदियों और प्राकृतिक स्थलों को बर्बाद किया जा रहा है। इस तरह के बड़े मात्रा में खनन से ही नदियों में बाढ़ की स्थिति ज्यादा देखने को मिलती है और बाकी प्राकृतिक आपदाएं भी बढ़ने लगी हैं।

कभी-कभी तो इन खनन कंपनी कंपनियों द्वारा इतने बड़े पैमाने पर रेत खोदी जाती है कि नदी का रास्ता ही बदल जाता है और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती हैं। प्रशासन द्वारा कुछ मामलों में कार्यवाही की जाती है लेकिन खनन कारोबारियों को इस से भी कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा है।

एक माह पहले ही शहडोल जिले की राजस्व, वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने पोड़ी गांव के पास हो रहे अवैध खनन से कुछ वाहन और व्यक्तियों को पकड़ा था। अनूपपुर में भी इस तरह के खनन माफियाओं के ऊपर कार्यवाही की गई थी लेकिन इसके बावजूद भी स्थिति में कोई खास परिवर्तन होता नहीं दिख रहा है। खनन कारोबारी अभी भी बेखौफ होकर खनन में लगे हुए।

इस विषय में जब उमरिया कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव से पूछा जाता है तो उनका कहना होता है कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और अगर खनन कारोबारियों द्वारा इस तरह की गतिविधि की जा रही है तो टीम भेजकर कार्रवाई की जाएगी। रेत खनन कारोबारियों पर जल्द से जल्द लगाम कसने की जरूरत है ताकि पर्यावरण को हो रहे नुकसान से बचाया जा सके।

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