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बैगा समुदाय की भूमि संबंधी मांग को लेकर NSUI ने सौंपा ज्ञापन

अनूपपुर के राजेंद्रग्राम में बैगा समुदाय की विभिन्न मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा गया। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के ब्लॉक अध्यक्ष रोहित सिंह मरावी के नेतृत्व में 25 अक्टूबर को पुष्पराजगढ़ के एसडीएम के नाम ज्ञापन सौंपा गया। एसडीएम की ओर से नायब तहसीलदार आदित्य द्विवेदी ने ज्ञापन प्राप्त किया।

ज्ञापन में बेगा समुदाय की कई प्रकार की मांगों का उल्लेख किया गया है। जिसमें सबसे प्रमुख वनाधिकार के पट्टे की मांग है। अनेक बैगा समुदाय के लोगों का कहना है कि वे कई सालों से उस भूमि पर रह रहे हैं जो वनाधिकार क्षेत्र में आती है लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से उन्हें उस जमीन का पट्टा नहीं दिया गया है।

इसके साथ ही वन्य क्षेत्र में रहने वाले बैगा सहित अन्य जनजाति लोग सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं के अभाव में भी जीवन बिताने को मजबूर है। अभी भी लोगों तक बिजली-सड़क-पानी शिक्षा स्वास्थ्य जैसी मूलभूत आवश्यकताएं नहीं पहुंच पाई हैं। बैगा समुदाय द्वारा एनएसयूआई के माध्यम से सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि पुष्पराजगढ़ जनपद की ग्राम पंचायतों डूमरीटोला में कई सालों से बैगा जनजाति रह रही हैं, लेकिन वन विभाग द्वारा उन्हें जबरदस्ती वहां से निकाला जा रहा है।

इसकी सूचना अनूपपुर जिला कलेक्टर को की गई थी और कलेक्टर के आश्वासन के बाद वन विभाग मौके से चला गया था। लेकिन अभी भी इन बैगा समुदाय के लोगों की भूमि के पट्टे संबंधी समस्या बनी हुई है। केवल डूमरटोला ही नहीं बल्कि कालाडाही, गर्जनबीजा, संचरा, हिरनाछापर जैसे अनेकों गांव में रह रहे इन बैंगा लोगों के साथ भी यही समस्या है। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि बैगा लोगों की मांग 10 दिनों के भीतर नहीं मानी गई तो उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

सालों से रहते आए बैगा लोगों को उनकी जमीन से निकाला जाना एक दुखद खबर है। ऐसे अनेक भू माफिया हैं जो जंगल और पहाड़ों की जमीन में कब्जा करके इमारतें बना लेते हैं या खनन करते हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती लेकिन इन मासूम बैगा लोगों को यहां रहने भी नहीं दिया जा रहा है। वन विभाग द्वारा यदि इन्हें बेघर कर दिया जाता है तो इनके आवास की जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी स्पष्ट करना चाहिए और जल्द से जल्द इस समस्या को हल किया जाना चाहिए।

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