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लगातार हो रहे पेट्रोल व डीजल महेंगे, बढ़ती महंगाई लोगों के लिए चिंता का विषय

मंहगाई की मार सीधा थाली पर करे वार, आज फिर एक बार शहडोल की हालत में यह बात फिट होती हुई नज़र आती है। हालत यह है कि दिन प्रतिदिन पेट्रोल व डीजल के दामों में बढ़ोतरी देखी जा रही है जिस कारणवश अब बस संचालन में भी कई बाधाएं आने लगी है। अब एक आम इंसान करे भी तो क्या करे? एक समय हुआ करता था जब जिला मुख्यालय स्थित शहडोल बस स्टैंड में करीबन 170 बसें प्रतिदिन संचालित हुआ करतीं थीं।

लेकिन अब इन बढ़ते पेट्रोल और डीजल के दामों के कारण बस संचालक बसों का संचालन करने में असमर्थ नज़र आ रहे हैं। अब बसों का संचालन नहीं होगा तो आम सी बात है की इन पेट्रोल और डीजल स्टेशंस में काम कर रहे लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, और हाल यही है। डीजल मैकेनिक बेरोजगारी की कगार पर पहुँच गए हैं।

इसी पर बस ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अपनी परेशानी व्यक्त करते हुए कहते हैं कि इन मैकेनिकों द्वारा पूरी ज़िन्दगी एक बस स्टैंड में गुज़ारी गई है, अब आखिर यह कहाँ जाएंगे यह चिंता का विष्य है। और यह केवल डीजल मैकेनिक की बात यहाँ नहीं चल रही बल्कि खलासी ड्राइवर, कुली और बस सर्विस से जुड़े लोग बस बंद होने से परेशान हैं जिस कारणवश अब इनके सामने रोज़गार को लेकर संकट खड़ा हो चूका है।

डीजल की बाधित महंगाई की यदि बात की जाए तो इससे सफर का किराया भी बढ़ता हुआ नज़र आ रहा है। रीवा जाने का किराया बढ़कर 300 तक पहुँच गया है। 6 महीने से लगातार पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा हो रहा है। अब आम इंसान के लिए घर खर्च चलाने को लेकर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है, क्यूंकि बढ़ते दामों की वजह से लोगों की जेब का बजट गड़बड़ा रहा है। अब किस प्रकार आम आदमी अपने गृहस्ती का खर्च व्यवस्थित करे? अब एक आदमी के लिए राहत की उम्मीद आये भी तो कहाँ से आये? न इस मामले में विपक्षी आवाज़ उठा रहे हैं और न ही प्रदेश व राज्य सरकार इस बारे में सोच रहें हैं।

शनिवार को पेट्रोल का दाम 118 रुपए 33 पैसे था और डीजल का 107 रुपए 52 पैसे प्रति लीटर दर्ज किया गया था।

अब तेल के दामों में बढ़ोतरी होने के कारण महंगी हो चुकी है सब्ज़ी, दालें व अन्य भी कई सामग्री, जिसपर व्यापरियों का कहना है कि माल ढुलाई बढ़ा दी गई है जिससे यह आवश्यकत सी बात है की सामानों का रेट भी बढ़ेगा। बता दें कि ये इजाफा कोई आम इजाफा नहीं बल्कि पुरे 15 से 20 प्रतिशत है, अब माचिस की ही बात कर लें तो कहाँ एक समय था जब माचिस की डबी की कीमत 1 रुपए हुआ करती थी अब उसका भी दाम बढ़कर 2 रुपए कर दिया गया है।

अब बढ़ते पेट्रोल व डीजल के कारण बस में यात्रा कर रहे लोगों में भी काफी कमी देखि गई है क्यूंकि बसों का किराये में भी वृद्धि होना लाज़मी है। 70 बसों के पहिये थम जाने के कारण सभी की आजीविका पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। उम्मीद यही कर सकते हैं कि सरकार ज़मीनी हकीकत को जानने के बाद ही ऐसा कुछ स्टेप ले ताकि लोगों को ऐसी मुसीबतों का सामना वो भी ऐसे समय में जब त्योहारों का सीजन हो तब न करना पड़े।

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