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“कलेक्टर- कुम्हारों के बचे दीयों को खरीदा जायेगा,” भाड़ा भी माफ

कोरोना काल और अब महंगाई की मार ने समाज के हर तपके को जीवन के ऐसे मोड पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां केवल निराशी के बादल छाए हुए दिखते हैं। एक ऐसा ही समुदाय है कुम्हारों का जो पूरे साल दिए और घड़े बनाकर गर्मी और दीपावली का इंतज़ार करते हैं। कोरोना के संक्रमण के कारण ग्रीष्म ऋतु और बीते वर्ष के दीपोत्सव में बाज़ार एकदम शिथिल हो चला था जिसके कारण इस वर्ग को अधिक मार पड़ी थी।

इस वर्ग की परेशानियाँ देख प्रशासन आगे आती हुई नजर तो आने लगी है जहां जिले की कलेक्टर श्रीमती वंदना वैद्य ने इन कुम्हारों की बैठकी को माफ करने की घोषणा की थी, वहीं सीमेंट कारोबारी प्रकाश रस्तोगी ने दुरुस्थ क्षेत्रों से मुख्यालय आकार इन कुम्हारों को आने जाने में लगने वाले यात्रा के भाड़े देने की बात सामने रखी, जिसको सुनकर कुम्हारों को काफी राहत की सांस मिली क्योंकि शहडोल में अधिकांश कुम्हार उमरिया जिले के चंदिया क्षेत्र से यहाँ आते है, जिनको अपना सफर तय करने में हजारों रुपए खर्च करने पड़ते हैं।

इसी के साथ कारोबारी गुडू रस्तोगी ने कुम्हारों को और राहत दिलाने का निश्चय किया है जहां पर वो इन कर्मचारियों से धनतेरस के पर्व पर मिले और उनसे कहा की धनतेरस से लेकर दीपोत्सव तक जिन-जिन कुम्हारों के पास इन दीयों की बिक्री हो जाने के बाद शेष दिए बच जाते हैं, उन दीयों को रस्तोगी द्वारा खरीद लिया जाएगा। उन्होंने आगे यह भी कहा की दुपहर तक यह शेष दिए ले जाया जाएगा और शाम तक उन्हे क्षेत्र के मंदिरों में प्रज्वलित कर दिया जाएगा।

उम्मीद यही होगी की प्रशासन द्वारा इन वर्ग के लोगों को दिए राहत पर पूरा अमल हो, ऐसा न हो की हमेशा की तरह प्रशासन अपने वादों से मुकरती हुई नजर पड़ रही हो। इन कुम्हारों की ज़िंदगी में परेशानियों का हल निकालने के लिए प्रशासन द्वारा रखा गया प्रस्ताव काफी खूब है लेकिन बात है की आखिर कब तक यह संभव हो पाएगा।

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