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बांधवगढ़ नेशनल पार्क में लगातार आ रही बाघों की मौत की खबरें,प्रकृति चक्र को भारी नुक्सान

उमरिया के बांधवगढ़ नेशनल पार्क में आय दिन बाघों की मौत की खबरें सामने आ रही है। विश्व भर में मशहूर बांधवगढ़ नेशनल पार्क आजकल सबकी चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले साल से लगातार बाघों और अन्य जंगली जानवरों की मृत्यु के कारण अब बांधवगढ़ नेशनल पार्क के अधिकारियों पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर इतनी कड़ी नज़र, देखभाल और पेट्रोलिंग के बावजूद भी नेशनल पार्क में बाघों की मौत कैसे हो रही है? इससे पर्यावरण का नुक्सान तो हो ही रहा है, साथ में देश भी अपने राष्ट्रीय जानवर को खोता जा रहा है।

अभी कुछ समय पहले ही बांधवगढ़ के पतौर रेंज में एक बाघिन द्वारा बाघ को मौत के घाट उतर देने की खबर सामने आयी थी। बाघ के शव के कुछ दूर आगे ही बाघिन को उसके शावकों के साथ पाया गया था जिससे अनुमान लगाया गया था कि उसने अपने शावकों को बचाने के लिए झड़प में बाघ को मार डाला है।

लेकिन ये तो बाघों के आपसी संघर्ष में हुई मौत है। इस साल में जो दो शावकों सहित 12 बाघों की मौत और जिले में तीन शावकों सहित 13 बाघों की मौत हुई है, अब इसकी वजह बाघों की आपसी लड़ाइयां है या अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुए बाघों का शिकार, इस बारे में अभी साफ नहीं कहा जा सकता। इस साल बांधवगढ़ ने अब तक 4 तेंदुए भी खो दिए हैं।

आय दिन ऐसा भी सुनने में आता है कि शेर या बाघ ने भैंस, गाय, बकरी या मानव जाति पर हमला कर दिया है। किंतु गौरतलब बात ये है कि जंगली जानवरों के जोन में अंदर जाने की अनुमति किसी को नहीं है, तो फिर ये लोग या कोई भी जानवर इस जोन में कैसे दाखिल हो जाता है। इसके पीछे का कारण साफ-साफ नेशनल पार्क के जंगली जानवरों द्वारा जान-माल की हानि पर मिलने वाला मुआवज़ा दिखाई दे रहा है। गांव के लोग नेशनल पार्क के अधिकारियों से सांठगांठ कर अपने जानवरों को चराने के लिए नेशनल पार्क लाते हैं और फिर जब बाघों या शेरों द्वारा हमला किया जाता है तब ये लोग पीड़ितों की तरह मुआवज़े की रकम की मांग करने लगते हैं।

अगर इसी तरह से अधिकारियों की लापरवाही पर कार्यवाही नहीं की गई तो ये मामले कभी थमने वाले नहीं। अगर इन अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही की जाए तो साल भर में लगातार होने वाली बाघों की संदिग्ध मौतों के बारे में पता चल सकेगा और बाघों की मृत्यु दर में भी कमी लाई जा सकेगी।

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