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आदेश पारित होने के बाद भी हितग्राहियों को नहीं मिल रही सस्ती रेत

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2022 तक सभी ग्रामीण इलाकों में पात्र लाभार्थियों के पक्के मकान बनाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लेकिन कोरोना लॉकडाउन की मंदी और बढ़ती हुई महंगाई के कारण मकान बनाने की आवश्यक सामग्रियां महंगी हो गई हैं। डीजल पेट्रोल के बढ़ते दाम से रेत, गिट्टी सीमेंट की ट्रांसपोर्ट लागत भी बढ़ गई है और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ जाने से कीमत भी बढ़ रही है।

यही कारण है कि सरकार द्वारा आवास निर्माण के लिए दी जा रही राशि कम पड़ रहा है, इसी को देखते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने ग्रामीण और शहरी इलाकों में रेत के दाम निर्धारित करने का नोटिस दिया था। जिसके तहत पीएम आवास योजना के हितग्राहियों को सस्ते दामों पर आवास निर्माण के लिए रेत उपलब्ध होनी थी।

हाल ही में शहडोल जिले में भी जिला कलेक्टर द्वारा ग्रामीण इलाकों में 1000 रुपए प्रति ट्रॉली रेत के हिसाब से पीएम आवास योजना के तहत हितग्राहियों को रेत उपलब्ध कराने का फैसला लिया गया था, लेकिन अनुपपुर में अभी भी आवासी के लाभार्थियों को रेत नहीं मिल पा रही है और इसका खामियाजा हितग्राहियों को भुगतना पड़ रहा है।

रेत की बाजार कीमत की बात करें तो अभी अनुपपुर में एक ट्रॉली रेत की कीमत लगभग पांच से छै हज़ार रुपए चल रही है। प्रशासन की योजना अगर सही रूप से लागू की जाती है तो इसी एक ट्रॉली रेत की कीमत घटकर 1000 रुपए तक हो जाएगी और पीएम आवास योजना के हितग्राहियों को महंगाई से कुछ राहत मिल सकेगी।

लेकिन अभी भी विभागों के अधिकारी लेटलतीफी कर रहे हैं और ग्रामीण लोगों को सस्ते दाम पर रेत उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिला प्रशासन द्वारा इस दिशा में सख्ती से काम नहीं लिया जा रहा है। जरूरत है जल्द से जल्द सही मानक को निर्धारित किया जाए और रेत की कीमत तय कर के जल्द से जल्द हितग्राहियों को सस्ती रेत उपलब्ध कराई जाए।

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