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करोड़ों की लागत से बन रहे बांध का निर्माण कार्य 5 साल बाद भी नहीं हुआ पूरा

शहडोल के दुधरिया तालाब बांध योजना के तहत बनाये जाने वाले बांध में लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि ठेकेदारों और इंजीनियरों द्वारा तकनीकी गड़बड़ियां की जा रही हैं जिसके कारण करोड़ों की लागत से बनाया जा रहा यह बांध अनुपयोगी साबित हो रहा है।

जानकारों की मानें तो इस पूरे बांध परियोजना की लागत लगभग 9 करोड़ रूपए है लेकिन 5 साल बाद भी इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। इस बांध के निर्माण में न तो तय मापदंडों का पालन किया जा रहा है और ना ही उचित तकनीक का। यहाँ तक की बांध की गुणवत्ता की ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

यही कारण है कि 5 साल से ज्यादा का समय बीत जाने पर भी, अभी तक इस बांध योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस बांध में न तो वेस्टवेयर सही स्थान पर लगाया गया है, न ही उचित खुदाई की गई है। इस वजह से बरसात के मौसम में हर साल यहाँ ओवरफ्लो की समस्या बनी रहती है और बांध के आसपास किसान के खेतों की फसलों के नुकसान की संभावना भी रहती है।

बांध के अलावा इसके आसपास के चार गांवों को नहर के माध्यम से भी जोड़ना था, लेकिन यह कार्य भी अधूरा पड़ा हुआ है। दो नहरें जो बांध से निकाली गई थीं उनकी मेढ़ पूरी तरह से टूट चुकी है और वे बर्बाद हो चुकी हैं । इन गड़बड़ियों के कारण अभी तक प्रशासन को पचास लाख रूपए अतिरिक्त लगाना पड़ गया है।

यही रवैया रहा तो न जाने कितना और नुकसान अभी प्रशासन को झेलना पड़ेगा और लेटलतीफी का खामियाजा किसानों और आम आदमी को झेलना होगा। संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द इस विषय में संज्ञान लेना चाहिए और बांध निर्माण का कार्य पूर्ण कराना चाहिए। शहडोल के दुधरिया तालाब बांध योजना के तहत बनाये जाने वाले बांध में लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि ठेकेदारों और इंजीनियरों द्वारा तकनीकी गड़बड़ियां की जा रही हैं जिसके कारण करोड़ों की लागत से बनाया जा रहा यह बांध अनुपयोगी साबित हो रहा है।

जानकारों की मानें तो इस पूरे बांध परियोजना की लागत लगभग 9 करोड़ रूपए है लेकिन 5 साल बाद भी इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। इस बांध के निर्माण में न तो तय मापदंडों का पालन किया जा रहा है और ना ही उचित तकनीक का। यहाँ तक की बांध की गुणवत्ता की ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

यही कारण है कि 5 साल से ज्यादा का समय बीत जाने पर भी, अभी तक इस बांध योजना का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस बांध में न तो वेस्टवेयर सही स्थान पर लगाया गया है, न ही उचित खुदाई की गई है। इस वजह से बरसात के मौसम में हर साल यहाँ ओवरफ्लो की समस्या बनी रहती है और बांध के आसपास किसान के खेतों की फसलों के नुकसान की संभावना भी रहती है।

बांध के अलावा इसके आसपास के चार गांवों को नहर के माध्यम से भी जोड़ना था, लेकिन यह कार्य भी अधूरा पड़ा हुआ है। दो नहरें जो बांध से निकाली गई थीं उनकी मेढ़ पूरी तरह से टूट चुकी है और वे बर्बाद हो चुकी हैं । इन गड़बड़ियों के कारण अभी तक प्रशासन को पचास लाख रूपए अतिरिक्त लगाना पड़ गया है।

यही रवैया रहा तो न जाने कितना और नुकसान अभी प्रशासन को झेलना पड़ेगा और लेटलतीफी का खामियाजा किसानों और आम आदमी को झेलना होगा। संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द इस विषय में संज्ञान लेना चाहिए और बांध निर्माण का कार्य पूर्ण कराना चाहिए।

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