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दिवाली की आतिशबाजी के बाद भी संभाग का एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहतर

हर साल दिवाली की आतिशबाजी और पराली को जलाये जाने के कारण देश के अनेक शहरों में हवा की गुणवत्ता में गिरावट आ जाती है। इस साल भी हम देख पा रहे हैं कि दिल्ली, भोपाल जैसे शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 के पार पहुँच चुका है जो काफी खराब है। जबकि हम शहडोल संभाग के तीनों जिलों की बात करें तो यहाँ का एयर क्वालिटी इंडेक्स काफी अच्छा कहा जा सकता है।

संभाग के तीनों जिलों के लोग अच्छी हवा में सांस ले रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार बीते दो सप्ताह में संभाग के तीनों जिलों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 75 से 99 के बीच रहा है जो एक अच्छा एयर क्वालिटी इंडेक्स कहा जा सकता है।

16 नवंबर को दर्ज किए गए आंकड़ों की मानें तो शहडोल जिले में एयर क्वालिटी इंडेक्स औसतन 80 से 82 के करीब वही उमरिया जिले में लगभग 76 और अनुपपुर में 98 के आसपास एयर क्वालिटी इंडेक्स दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों में शहर को तीन जोन्स रिहायशी, व्यवसायिक और साइलेंस जोन में विभाजित कर आंकड़े इकट्ठे किए गए हैं।

हवा प्रदूषण के लिए जिम्मेदार पीएम 10 और 2.5 की मात्रा भी तय मानकों के अनुरूप ही आंकी गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तय किए गए मानकों में 50 से 100 के बीच एयर क्वालिटी इंडेक्स संतोषजनक कहा जाता है। इस प्रकार शहडोल संभाग के तीन जिलों का एयर क्वालिटी इंडेक्स भी अच्छे की श्रेणी में आता है।

जानकारों और पर्यावरणविदों का मानना है कि शहडोल संभाग की अच्छी हवा के लिए सबसे प्रमुख कारण यहाँ के घने जंगल हैं। पेड़ पौधों की पत्तियाँ धूल के कणों को अपने ऊपर धारण कर लेती हैं। वही कार्बन डाई ऑक्साइड को भी सोख लेती हैं। पेड़ पौधों की मात्रा अधिक होने से वातावरण में नमी भी अधिक होती है जिसके कारण धूल कण हवा में टिक नहीं पाते। यही कारण है कि शहडोल संभाग के तीन जिलों में अच्छा एयर क्वालिटी इंडेक्स बताया जा रहा है। जरूरत है इस स्थिति को बनाए रखा जाए और बेहतर किया जाए।

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