Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on pinterest

स्वच्छता रैंकिंग में 28 पायदान उठकर 52वें स्थान पर पंहुचा शहडोल जिला

देशभर में स्वचछता कायम रहें, इस लिए सरकार द्वारा कई प्रयास किए जाते हैं। लोगों को स्वच्छता के महत्व और परिसर में साफ-सफाई रखने के लिए भी जागरूक किया जाता है। ऐसे ही प्रयासों से शहडोल नगरपालिका ने जिले को स्वच्छता की रैंकिंग में 28 पायदान से उठाकर 52वें स्थान पर पंहुचा दिया है।

ज्ञात हो कि पिछले साल नगरपालिका द्वारा क्षेत्र सर्वेक्षण में शहडोल जिला 80वें स्थान पर था, लेकिन इस साल रैंकिंग में सुधार लाते हुए शहडोल 52वें स्थान पर आ गया है। जिसके लिए नगरपालिका अध्यक्ष उर्मिला कटारे ने शहडोल जिले के लोगों के प्रति आभार जताया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता कर्मियों और जिला वासियों के सहयोग से ही शहडोल जिले में साफ-सफाई को मेंटेन किया जा सका है। लेकिन बस इतना ही नहीं, जिले को साफ रखने के लिए हमें दैनिक जीवन में स्वच्छता को एक आदत बनाना होगा।

लेकिन दिन पर दिन बढ़ती आबादी के कारण लोगों द्वारा कचरा फैलाया जाता है। यह कचरा ज़्यादातर प्लास्टिक की पॉलिथीन का ही होता है। शहडोल नगरपालिका में बढ़ती आबादी के साथ लोगों द्वारा सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग भी बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से अच्छी सुविधाएं पाने के लिए लोग शहडोल के शहरी क्षेत्र में आते हैं और रोजमर्रा की सामग्री को सिंगल यूज़ प्लास्टिक में भरकर इस्तेमाल करने के बाद बाहर फेंक देते हैं। जिससे कचरा तो फैलता ही है, साथ ही ये जानवरों और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। सिर्फ ग्रामीणों द्वारा नहीं शहर के पढ़े-लिखे लोगों द्वारा भी ऐसा किया जाता है। जिसके लिए समय-समय पर लोगों को जागरूक करते रहना बेहद ज़रूरी है।

नपा अध्यक्ष द्वारा दिया गया ये बयान हर मायने में सही हैं किंतु अगर लोगों के माध्यम से देखा जाए तो बाज़ार में भी हर जगह दुकानदारों द्वारा ज़्यादातर सामग्री रखने के लिए पॉलिथीन का ही इस्तेमाल किया जाता है, तो लोग भी इन्हीं पॉलिथीन बैग में सामान लेते हैं। या तो प्रशासन द्वारा पॉलिथीन के इस्तेमाल पर रोक लगाई जानी चाहिए, या इन पॉलिथीन बैग्स की जगह जूट या पेपर से बने बैग का इतेमाल हर दुकान में अनिवार्य किया जाना चाहिए। तभी पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

साथ ही लोगों को प्लास्टिक का कचरा प्लास्टिक के डस्टबिन जो कि नीले रंग के होते हैं, उनमें ही फेंकने के लिए जागरूक करना चाहिए, ताकि इस कचरे को री-साइकिल किया जा सके। और साफ-सफाई के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सके।

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter
Share on telegram
Share on pinterest

साझा करें

ताजा खबरें

सब्सक्राइब कर, हमे बेहतर पत्रकारिता करने में सहयोग करें