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स्टाफ की कमी से बंद पड़े जिला अस्पताल के कई कमरे, लोगों को जांच के लिए निजी स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ रहा

अनूपपुर के जिला अस्पताल में प्रशासन द्वारा सभी तरह के चिकित्सकीय संसाधन तो उपलब्ध करा दिए गए हैं, किंतु ये सभी संसाधन अब बेकार मालूम पड़ रहे हैं, क्योंकि जब अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ ही चिकित्सा उपकरणों को चलाने के लिए मौजूद नहीं होगा तो भला आमजन इन सभी चिकित्सकीय व्यवस्थाओं का उपयोग कैसे कर पायंगे? अंत में थक-हारकर इन लोगों के पास निजी अस्पताल या किसी निजी चिकित्सा सेंटर में ही जाकर अपने चेकअप और टेस्ट करवाने पड़ते हैं।

प्रशासन द्वारा नए और महंगे उपकरण तो जिला अस्पताल में भिजवाए जा रहे हैं, किंतु स्टाफ की कमी को लेकर प्रशासन कुछ खास मदद नहीं कर पा रहा है। आलम ये है कि कई सालों और महीनों से अस्पताल के कई कक्ष बंद पड़े हुए हैं और यहां रखे उपकरणों पर धूल की मोटी परत जम गई है, क्योंकि वर्तमान में यहां स्टाफ के नाम पर सिर्फ 13 चिकित्सक ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि लगभग 48 पद जिला अस्पताल में स्वीकृत किए गए हैं। और विशेषज्ञ के रूप में यहां सिर्फ 2 ही चिकित्सक मौजूद है।

स्टाफ की कमी से यहां स्थानीय लोगों को रोज़ाना बहुत परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं, क्योंकि वर्तमान में जिले में लगभग 8810 गर्भवती महिलाएं मौजूद हैं और अपने शिशु की जांच के लिए इन्हें निजी सोनोग्राफिक सेंटर जाना पड़ता है जहां सिर्फ एक भ्रमण पर ही इनके 800 से ज़्यादा रूपए खर्च हो जाते है।

ऐसा नहीं है कि जिला अस्पताल में सोनोग्राफिक मशीन नहीं है, मशीन तो हैं किंतु इनका संचालन करने वाले एकलौते रेडिओलॉजिस्ट चिकित्सक अब रिटायर हो चुके हैं और कोई दूसरे रेडियोलाजिस्ट को यहां पर अभी तक कार्यरत नहीं किया गया है।

जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपी कक्ष में भी पिछले 2 महीने से ताला लटका हुआ है क्योंकि जो फिजियोथेरेपिस्ट यहां सेवाएं दे रहा था, उसके पद और वेतन को लेकर भी कोई खास निर्धारण नहीं किया गया, तो उसने यहां काम करना ही बंद कर दिया।

बहुत समय पहले भी स्टाफ की कमी को लेकर स्वास्थ्य मंत्री को अवगत कराया गया था, और उन्होंने इसका निराकरण हेतु आश्वासन भी दिया था, किंतु अभी तक इस मामले में कोई खासा कदम नहीं उठाया गया है। या यूं कहले कि शायद प्रशासन जिला अस्पताल की इतनी बड़ी समस्या के बारे में भूल ही गया है।

अनूपपुर के सीएमएचओ डॉ. एससी राय ने कहा है कि जल्द ही इस समस्या का निराकरण किया जाएगा, और स्टाफ की कमी को भी पूरा किया जायगा, साथ ही स्थानीय स्तर पर डायलिसिस और फिजियोथेरपिस्ट का संचालन भी जल्द ही शुरू किया जायगा, लेकिन अब वक्त है कि इन कार्यों को सिर्फ बोला ही नहीं, पूरा भी करके दिखाया जाए।

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