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शासकीय भूमि पर रह रहे लोगों को घर गिरा देने का नोटिस का तमाचा, रिश्वत की बात का भी मामला आया सामने, स्थानीय लोगों में आक्रोश

गांव बेम्हौरी में शासकीय भूमि पर भवन निर्माण कर लोगों द्वारा बहुत समय से रहा जा रहा है, जिस पर एक्शन लेते हुए प्रशासन द्वारा लोगों को घर खाली करने के कई नोटिस जारी किए गए थे, पर उनके द्वारा ऐसा नहीं किया गया। अब इस मामले पर सख्त एक्शन लेते हुए प्रशासन द्वार घरों को गिरा देने का नोटिस जारी किया जा रहा है।

लेकिन गौरतलब बात ये है कि लोगों को घर गिरा देने के जारी नोटिस के अगले दिन ही उन्हें मकान को गिराने की करवाई की चेतावनी दी जाती है। तो भला आम आदमी एक दिन में कैसे इस मुसीबत को निपटा सकेगा? कैसे वो अपना घर एक दिन में खाली कर किसी दूसरी जगह पर जा सकेगा?

हाल ही में एक मामला सामने आया है जिसमें बुढ़ार तहसीलदार के ग्राम बेम्हौरी निवासी संतोषी त्रिपाठी को एक नोटिस 29 नवंबर को जारी किया गया है, जो कि उन्हें 30 नवंबर 2021 को दिया गया, जिसमें ये बात लिखी गयी है कि उसके बेम्हौरी स्थित मकान को 1 दिसंबर 2021 सुबह 9 बजे गिराया जायगा। क्या ये उचित है ? अब एक दिन के वक्त में भला कैसे कोई कानूनी सहायता प्राप्त कर सकेगा?

वैसे प्रदेश भर में प्रशासन द्वारा यह दावा किया जाता है कि जिस शासकीय भूमि पर लोग बहुत समय से घर बनाकर रह रहे हैं, उन्हें उनकी जमीन का मालिकाना हक दिया जायगा, किंतु अब प्रशासन अपने द्वारा ही किए गए दावों से पीछे क्यों हट रहा है? यहां रह रहे लोग जब प्रशासन को उनकी भूमि पर रहने के लिए बिजली, पानी, हाउस टैक्स, और सभी सुविधाओं के लिए राशि का भुगतान कर रहे हैं, तो एक नोटिस के बाद ही इनका घर गिरा देने की चेतावनी और तत्काल कार्यवाई करना कहां तक उचित है? इनके द्वारा घर गिरा देने के नोटिस पर आमजन घबरा जाते हैं, और अंत में उनको दलाल व रिशवत जैसे विकल्पों का ही सहारा लेना पड़ता है।

स्थानीय वासियों का कहना है कि उनके साथ ऐसा जानबूझकर किया जाता है। क्योंकि प्रशासन जानता है कि अगर उन्होंने कॉलोनी के सभी वासियों को एकसाथ घर खाली करने को कहा, तो ये सभी लोग एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा या आंदोलन भी कर सकते हैं। तो इन्होंने अब नया खेल शुरू किया है, जिससे ये लोग इन कॉलोनी में रह रहें लोगों से उनके घर गिरा देने के नोटिस जारी कर तुरंत कार्यवाई का आदेश देते हैं। अंततः इन लोगों को इस मामले को शांत करने और अपने घर बचाने के लिए रिश्वत का सहारा लेना पड़ेगा।

इस नोटिस और कार्यवाई के आदेश से साफ समझ आता है कि प्रशासन की मंसा जनता के भले का नहीं बल्कि लोगों को परेशान करने का है। कुछ स्थानीय लोग तो यहां तक भी कह रहे हैं कि ये आम आदमी जिसकी पूरी ज़िंदगी की कमाई एक घर होती है, उसे परेशान करने और मोटी वसूली करने की मंसा से की जा रही है।

प्रदेश भर में कई ऐसी खाली जगह बेकार पड़ी हैं, किंतु प्रशासन इन गरीब लोगों के आवासों के पीछे हाथ धोके पड़ा है। प्रशासन द्वारा खेला जा रहे इस षड़यंत्र ने इन ग्रामीणों में आक्रोश पैदा कर दिया है, और ऐसी भी खबर है कि जल्द ही प्रशासन और ग्रामीणों के बीच टकराव देखने को मिल सकता है।

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