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शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने का दावा, किंतु एक दिन पहले मिले नोटिस के बाद मकान गिराना कहा तक उचित?

जैसा कि वोकल न्यूज़ शहडोल ने आपको हाल ही में बताया था कि बुढ़ार तहसीलदार द्वारा गांव बेम्हौरी की निवासी संतोषी त्रिपाठी को 30 नवंबर को एक नोटिस जारी किया गया था कि उनका मकान जो कि एक शासकीय भूमि पर बनाया गया है, उसको 1 दिसंबर 2021 को प्रशासन द्वारा गिरा दिया जायगा।

मकान गिराने के एक दिन पहले ही नोटिस मिलने पर संतोषी त्रिपाठी किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता प्राप्त नहीं कर सकी,नतीजा ये रहा कि उसके मकान पर 1 दिसंबर को प्रशासन द्वारा बुलडोज़र चला दिया गया और उसका मकान जमींदोज कर दिया गया।

सूत्रों के अनुसार ऐसा मालूम हुआ है कि संतोषी त्रिपाठी का मकान बुढ़ार तहसीलदार मिनाक्षी बंजारे के नेतृत्व में नगर प्रशासन व पुलिस फाॅर्स द्वारा जमींदोज किया गया है। बता दें कि स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा जानबूझकर शासकीय भूमि पर भवन निर्माण कर रह रहे लोगों की कॉलोनियों में किसी एक चुने हुए परिवार को ही मकान गिराने के नोटिस जारी किए जाते हैं, ताकि स्थानीय लोग संगठित न हो सके या मकान मालिक किसी भी प्रकार कि कानूनी सहायता न प्राप्त कर पाए और उसे किसी दलाल या रिश्वत जैसे विकल्पों का ही सहारा लेना पड़े।

वैसे तो मकान का एक ही हिस्सा बुडोज़र के ज़रिये गिराया गया है, किंतु अगर इंसानियत की नज़र से देखा जाए तो ये घर एक व्यक्ति की पूरी जिंदगी भर की कमाई होती है, पूरी जिंदगी की यादें उस व्यक्ति ने उस घर में संजोई रखी होती है किंतु प्रशासन के एक कदम ने उसको एक झटके में चकनाचूर कर दिया है।

बुढ़ार तहसीलदार मिनाक्षी बंजारे ने वाकई ही अतिक्रमण पर कार्यवाही करते हुए एक मिसाल कायम की है, पर अगर वो चाहे तो एक और मिसाल भी कायम कर सकती हैं, अगर वे ये जानकारी साझा करें कि उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में और कितने गैर आधिकारिक सरकारी जमीन पर बने मकान गिराए हैं। या कितने मकान सरकारी ज़मीन पर बने हुए हैं और वो कब तक उन मकानों को एक-एक करके जमींदोज करती रहेंगी और कब तक सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त करवा सकेंगी।

अब इस केस में एक नई बात भी सामने आई है कि संतोषी त्रिपाठी के पति को सूदखोरी के मामले में 28 नवंबर को गिरफ्तार कर उनको जेल भेज दिया गया था।

उसके बाद उनकी गैर हाज़िरी में प्रशासन ने पहले 30 नवंबर को उनकी पत्नी को नोटिस जारी किया जो कि संतोषी त्रिपाठी के मकान के संबंध में था फिर उसके एक दिन बाद उनका मकान गिरा दिया गया। संतोषी व उसके पूरे परिवार का यह आरोप है कि उक्त जमीन में कुछ हिस्सा उनके पट्टे की जमीन है। उसे भी प्रशासन ने जबरदस्ती जमींदोज कर दिया है।

वहीं इस पूरे मामले में मौके पर पहुचे एसडीओपी भारत दुबे व तहसीलदार मीनाक्षी बंजारे ने कहा कि शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा रहा है। साथ ही एंटी माफिया के तहत भी कार्रवाई की जा रही है।

इस परिस्थिति से दो सवाल निकलते हैं-

पहला,अगर प्रशासन का यह कहना है कि जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है तो यहां रह रहे बहुत सारे परिवारों के घर शासकीय भूमि पर ही बने हुए हैं, तो सबको क्यों नहीं ज़मीनदोज किया गया?

दूसरा, अगर कार्यवाई सूदखोरों के खिलाफ की जा रही है तो पुलिस व प्रशासन को आरोपी और उसके परिवार को इस संबंध में कोर्ट का आर्डर दिखाना चाहिए।

ये दो ऐसे सवाल है जिनका जवाब प्रशासन के पास खुद ही नहीं है।

पुलिस फोर्स और शासन का यह मिलीभगत का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा, पर गांव वासियों ने साफ कर दिया है कि वे संतोषी त्रिपाठी और उसके पूरे परिवार के साथ हैं और उसके साथ हुए इस अन्याय की शिकायत वे प्रदेश सरकार के उच्चाधिकारियों से करेंगे।

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