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प्रतिमाह मिलते हैं 50 हजार सुरक्षा के नाम पर, फिर भी सुरक्षा की उड़ा रहे धज्जियाँ

सुरक्षा जिसकी हमने कल भी बात की, आज भी बात कर रहे हैं और न जाने कितनी दफा करते रहेंगे, लेकिन आखिर हो क्या रहा है? कोई सुधार होना तो दूर कोई इसपर नजर तक नही डालता।

आज बात हो रही है अनुपपुर की जहां एसईसीएल ने प्राइवेट ठेकेदारों को सुरक्षा का जिम्मा सौंप दिया था अब इन प्राइवेट ठेकेदारों के द्वारा प्राइवेट लोगों को रख लिया गया जिस प्रकार कालरी परिसर सुरक्षा का इंतजाम देखती थी, लेकिन फिर भी एसईसीएल ने प्राइवेट ठेकेदारों के माध्यम से सुरक्षा का जिम्मा हटाते हुए एसआईएसएफ के जिम्मे सौंप दिया। लेकिन आश्चर्य की बात है की इनके होने के बावजूद कालरी की सुरक्षा पर सेंध लगाते हुए कोल माफियाओं ने बड़े बड़े ट्रक वाहन परिसर के अंदर घुसा कर कोयला चोरी पिछले 3 महीनों से करते आ रहे हैं और इसकी भनक अधिकारीजन को लगी तक नही।

अब यह सोच के आश्चर्य भी होता है और इन हालातों को देख कर निराशा भी, 28 नवंबर की यह बात है जब रात पकड़े गए ट्रैलर वाहन की जानकारी एसआईएसएफ के जवानों को है तक नही। पर अच्छी बात यह रही की परिसर में मौजूद कांटा बाबू ने ट्रैलर वाहन को देख लिया और इसकी जानकारी तत्काल ही खान प्रबंधक को दी तब जाकर मामला खुला की परिसर में बड़े वाहनों से कोयले चोरी एसआईएसएफ सुरक्षा पर तैनात जवानों के रहते भी हो रही है।

यदि सुरक्षा कार्य की बात हो तो ठप नजर आती है प्रशासन, लेकिन बात जब इन सुरक्षा अफसरों की पेमेंट की आती है तो लाखों रुपए इनपे खर्च किए जाते हैं। प्रतिमाह प्रत्येक जवान को 50 हजार के हिसाब से सुरक्षा के नाम पर पेमेंट दी जाती है ताकि कालरी की सुरक्षा पर कोई लापरवाही न बरती जाए, लेकिन इसके बावजूद कालरी सुरक्षा पर सेध लगना कहीं न कहीं एसआइएसएफ की कार्यशेली पर सवालीय निशान खड़े करती है। और करे भी क्यूँ न, आखिर सुरक्षा के पहरेदार जो टहरे। अब इसके चलते देखना यह होगा की आखिर कब तक और क्या कार्यवाही प्रबंधन द्वारा इनके ऊपर ली जाती है। हालांकि प्रबंधन का कहना तो साफ है की सुरक्षा का जिम्मा हमने एसआईएसएफ के हवाले सौंप रखा है।

बात सोचने वाली है की सुरक्षा पर तैनात जवान को इतने बड़े ट्रैलर वाहन के अंदर घुसने की जानकारी क्या भनक तक नही लगी और वो भी तब जब जवानों की ड्यूटी लगी हुई थी। इसी कारणवश तैनात कर्मचारियों के विरुद्ध भी विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अब पुलिस के हाथों यह बड़ा मामला है, उनकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा की सच्चाई क्या है, आखिर किसकी लापरवाही के कारण ट्रैलर वाहन परिसर के अंदर प्रवेश किया है।

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