After all, how accused Neeraj Bishnoi made the bully bye app?
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आखिर कैसे आरोपी नीरज बिश्नोई ने बुली बाई एप को बनाया?

एक दौर हुआ करता था जब शातिर अपराधी को किसी बड़े अपराध को अंजाम देने के लिए बड़े पैमाने में लोगों की जरूरत पड़ती थी, बड़े ग्रुप हुआ करते थे, लेकिन आज एक ऐसा दौर आ चला है जहां सोशल मीडिया पर एक या दो लोग मिलकर के विश्वभर में हेट कैम्पैन चला सकते हैं। जी हाँ, और वो दो लोग कोई छोटा मोटा कैम्पैन नही चलाते बल्कि ऐसा कैम्पैन रचते हैं जिसका मकसद केवल राज्य को दुर्गति की ओर ढकेलना हो।

बुली बाई एप केस, जहां हमने देखा कैसे इस एप के जरिए मुस्लिम महिलायें, जिनका हम सभी जानते हैं सोशल मीडिया पर मजबूत राजनेतिक स्टैन्ड हुआ करता है सोशल मीडिया प्लाटफॉर्म्स पर, उनकी फ़ोटोज़ डाउनलोड कर उनकी नीलामी कर दी गई। और ये कोई एक्सपीरियन्सड व्यक्ति ने नही बल्कि 21 साल के उम्र वाले इंजीनियरिंग स्टूडेंट नीरज बिश्नोई हैं।

आरोपी ने पूछताछ में बताया है कि वो 15 साल की उम्र से हैकिंग और वेबसाइट डिफैंसिंग कर रहा था. पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपी ने हिंदुस्तान और पाकिस्तान की कई स्कूल और यूनिवर्सिटी की वेबसाइट भी हैक करने का दावा किया है. पुलिस की पूछताछ में आरोपी नीरज बिश्नोई ने बताया कि जापान की एक एनिमेशन गेम के कैरेक्टर से वो बहुत प्रभावित था. उसी गेम के कैरेक्टर से उसने GIYU इनिशियल के कई फ़र्ज़ी ट्विटर हैंडल बनाए थे. इन्हीं अकाउंट से जांच एजेंसीज को चैलेंज कर रहा था।

लेकिन अब बड़ा सवाल यह उठ कर के आता है की आखिर कैसे 21 साल वर्षीय युवक, इतना बड़ा हेट कैम्पैन चला सकता है? तो चलिए समझने की कोशिश करते हैं की आखिर कैसे अस्सम में बैठ कर के युवकों ने देश की साम्प्रदाईक भावना भड़का दी। तो जानते हैं पहले इसके मैकिंग प्रोसेस को, तो बुली बाई एपलिकेशन, गिट हब प्लेटफॉर्म पर रन किया गया था।

यदि बात करें गिट हब प्लेटफॉर्म की तो यह एक ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म है जहां कोई भी कोड फॉर्म कर के रन कर सकता है। मान लीजिए की यदि आप एक कोड लिख लें और उसको रन करवाना चाहें तो एक बने बनाए सॉफ्टवेयर के जरिए आप ऐसा कर सकते हैं, जिसका नाम है गिट हब जहां आप अपनी इमैल आयडी डालने के बाद, आपका उसपर फ्री अकाउंट बन जाएगा, और फ्री अकाउंट बनने के बाद कोई भी कोड आप रन कर सकते हैं।

लेकिन यहाँ एक गौर फरमाने वाली बात यह है की नीरज बिश्नोई ने बुली बाई ऐप्लकैशन बड़े शातिर दिमाग से बनाया है और कई चीजों का ध्यान रखते हुए बारीकी से बनाया गया, ताकि पुलिस की जांच से वो बचे रहें। यदि कोई आम इंसान होता तो वह गिट हब प्लेटफॉर्म पर अपनी मेल आईडी डालता लेकिन नीरज बिश्नोई ने यह अकाउंट प्रोटोन ईमेल के थ्रू बनाया। अब सवाल यह उठता है की प्रोटॉन ईमेल क्या होता है?

तो प्रोटोन ईमेल एक सिक्युर ईमेल होता है, जिसमे आया हुआ हर ईमेल इंक्रीपटेड होता है यानि की कोई भी जांच एजेंसी द्वारा उसे नही निकाला जा सकता। अब प्रोटॉन ईमेल के साथ लैअर ऑफ सिक्युरिटी डालते हुए यह सोचा की कल को यदि प्रोटोन वालों ने भी दिल्ली पुलिस को डीटेल दे दी इसलिए उन्होंने फिर इस्तेमाल किया प्रोटोन वीपीएन यानि की वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क, यानि की एक ऐसा नेटवर्क जो की कभी जापान से आपको दिखाएगा कभी स्विट्ज़रलैंड से, तो कभी आपको रशिया से दिखाएगा, तो वो आपकी लोकैशन बार बार बदलता रहेगा। वीपीएं का कान्सेप्ट ही यही होता है की यूजर के आईपी अड्रेस को छुपा कर के रखना।

अब सवाल यह उठता है की जब इतनी लैअर ऑफ सिक्युरिटी लगवा रखी तो आखिर पुलिस ने आरोपी को कैसे पकड़ा? तो देखिए की जब भी आप इस तरह आ कोई क्राइम कर रहे हो, तो एक छोटी सी गलती भी आपका आईपी अड्रेस डिस्क्लोज़ कर सकती है, जी हाँ। तो नीरज बिश्नोई द्वारा एक ट्विटर हैन्डल अकाउंट बनाया गया जिसका नाम था बुली बाई अन्डर्स्कोर। जिसको पुलिस द्वारा ट्रैक किया गया की वह यूजर आखिर कहाँ से आ रहा है। यह कारण से उनका आईपी अड्रेस डिस्क्लोज़ हो गया।

इस जांच के चलते राज्य सरकार द्वारा गिटहब को भी एक पत्र लिखा गया था की आप बताएँ की किसके द्वारा यह बनाया गया है। जिसका गिटहब ने जवाब दिया और सारी डिटेल्स दिल्ली पुलिस को सौंप दी, जिसकी मदद से दिल्ली पुलिस ने उनके ट्विटर हैन्डल की जांच करते हुए उन्हे धर लिया।

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