Whose government this time in UP?
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इस बार यूपी में किसकी सरकार?

लोकसभा चुनाव को लेकर यूपी में राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है । चुनाव को लेकर बड़े दलों के साथ छोटे दलों की सक्रियता भी बढ़ने लगी है, वहीं सभी बड़ेराजनीतिक दल मजबूती के साथ मैदान में उतरने के लिये अब छोटी- छोटी पार्टियों को अपने अपने खेमे में करने मे जुटे हैं । कांग्रेस इन छोटे दलों को जोड़कर सपा- बसपा गठबंधन और भाजपा का मुकाबला करने जा रही है, वहीं बीजेपी भी छोटे दलों को अपने साथ लेकर जीत दुहराना चाहती है। कांग्रेस को समर्थन देने वालों में अपना दल (कृष्णा गुट), जनअधिकार पार्टी, महान दल जैसे पार्टियां शामिल है।

सुहेलदेव समाज पार्टी के अलावा यूपी में बीजेपी को समर्थन देने वालों दलों में एकलव्य समाज पार्टी के अध्यक्ष जे.आर. निषाद, भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष नारायण राजभर, नवभारत समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह यादव, अहिंसा पार्टी के अध्यक्ष राजकुमार लोधी राजपूत व एक्शन पार्टी के अध्यक्ष रवीन्द्र कुमार मिश्र शामिल हैं। इन दलों ने लोकसभा चुनावों में पीएम मोदी को अपना समर्थन दिया है।

अब जब विधानसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं तो आकलन इस बात का भी किया जा रहा है कि कौन सी राजनीतिक पार्टी जमीनी स्तर पर सबसे ज्यादा अपनी पैठ बनाने की राह पर है। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर लंबे समय से नजर रखने वाले राजनीतिक विशेषज्ञ डॉ भास्कर कहते हैं कि 2017 में विधानसभा चुनाव के बाद जब भाजपा ने सत्ता संभाली तो विपक्ष के तौर पर समाजवादी पार्टी ही 47 सीटों के साथ सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के तौर पर बनी।

उसके बाद 19 सीटों के साथ बहुजन समाज पार्टी दूसरे नंबर पर और सात सीटों के साथ कांग्रेस तीसरे नंबर पर बतौर विपक्षी पार्टी रही। डॉक्टर भास्कर के मुताबिक सरकार बनने के बाद से ही समाजवादी पार्टी लगातार विपक्ष की भूमिका में जो उससे बन पड़ता था वह करती रही। लेकिन 2019 से कांग्रेस ने अपने संगठनात्मक फेरबदल के साथ ही आक्रामक भूमिका के तौर पर जमीन बनानी भी शुरू कर दी। हालांकि सात विधायकों वाली तीसरे नंबर की विपक्षी पार्टी होने के चलते पार्टी ने अपने नवनिर्वाचित अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को सामने रखकर धीरे-धीरे प्रियंका गांधी को आगे करना शुरू किया और प्रमुख विपक्षी पार्टी के तौर पर भी जगह बनानी शुरू कर दी।

चूंकि उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी है। ऐसे में बतौर विपक्ष की पार्टी के तौर पर जो किया जाना चाहिए वह समाजवादी पार्टी के नेता लगातार करते आ रहे हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार मैदान में उतर कर कई बड़े मामलों में प्रदर्शन करते रहे हैं। 2017 में सहारनपुर में दलितों की हत्या के बाद में समाजवादी पार्टी ने जिस तरीके से आंदोलन खड़ा किया था वह एक मिसाल है।

उन्नाव रेप कांड में भी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत उनकी पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। लखीमपुर कांड में भी अखिलेश यादव मैदान में उतर कर पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। समाजवादी पार्टी के नेताओं का तर्क है कि उनके नेता जमीन से जुड़े हुए हैं इसीलिए वह जमीन पर उतर कर आम आदमी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। समाजवादी पार्टी भी अन्य राजनीतिक दलों की तरह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती है।

इसी के साथ आम आदमी पार्टी सभी राजनीतिक पार्टियों के वोट बैंक में सेंधमारी करने की तैयारी में हैं। कानपुर में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। अब आगे क्या होगा देखने वाली बात होगी। खबरों से बने रहने के लिए वोकल न्यूज शहडोल को सबस्क्राइब जरूर करें।

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