Pradhan Mantri Krishi Sinchai Yojana, Main Objective, Working Style and Ground Reality
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प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मुख्य उद्देश्य, कार्यशैली और जमीनी हकीक़त

प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना भारत सरकार के द्वारा 2015 में शुरू हुई एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर पर सिंचाई में निवेश को आगे बढ़ाना, देश में खेती योग्य भूमि का विकास और विस्तार करना, पानी की बर्बादी को कम करने के लिए खेत में पानी के उपयोग को बढ़ाना, पानी की बचत करने वाली तकनीकों और सटीक सिंचाई को लागू करके प्रति बूंद फसल में वृद्धि करना है। देश में लगभग 141 मिलियन हेक्टेयर कुल बुवाई क्षेत्र में से वर्तमान में लगभग 65 मिलियन हेक्टेयर (45%) सिंचाई के लिए कवर है।

हमारे देश के किसान खेती के लिए बारिश पर निर्भर रहते हैं जबकि बारिश पर अत्यधिक निर्भरता गैर सिंचित क्षेत्रों में खेती को जोखिम भरा और कम उत्पादन करने वाला व्यवसाय बनाती है। इस योजना के अंतर्गत भारत सरकार देश के किसानों को अपने खेतों की सिंचाई के लिए उपकरणों पर सब्सिडी प्रदान करती है। यह सब्सिडी किसानो को उन सभी योजनाओं के लिए प्रदान की जाएगी, जिसमें पानी की बचत होगी। साथ ही कम मेहनत और कम खर्चे के साथ किसानों को खेतों में सिंचाई करने में सुविधा रहेगी।

15 दिसंबर को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को 5 वर्ष बढ़ा कर 2026 तक संचालित करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 22 लाख किसानों को लाभ पहुंचेगा जिनमे 2.5 लाख अनुसूचित जाति और 2 लाख अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं। केंद्र सरकार ने इस योजना के लिये 50000 करोड़ की राशि को स्वीकृति दी है। साथ ही स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई करने के लिए सरकार लागत का 80 से 90% अनुदान देगी। स्प्रिंकलर यंत्रों पर सब्सिडी देकर सरकार किसानों को इस विधि से सिंचाई करने के लिए बढ़ावा दे रही है। इस विधि से खेत को बिना समतल किये ही सिंचाई की जा सकती है।

कौन कर सकते हैं आवेदन-

1.किसान के पास खेती के लायक जमीन होनी चाहिए। देश के सभी किसान इसका लाभ ले सकते हैं।
2.सेल्फ हेल्प ग्रुप्स, ट्रस्ट, सहकारी समितियो, इंकॉर्पोरेटेड कंपनियों, उत्पादक कृषकों के समूहो के सदस्यो और अन्य पात्रता प्राप्त संस्थानों के सदस्यों को भी लाभ प्रदान किया जाएगा।
3.इस योजना के तहत उन संस्थानों और लाभार्थियों को भी पात्र माना जाएगा जो कम से कम 7 सालों से जमीन लीज लेकर खेती कर रहे हैं। Contract फार्मिंग से भी यह पात्रता प्राप्त की जा सकती है।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज –

1.आधार कार्ड
2.पहचान पत्र
3.किसानों की जमीन के कागजात व जमीन की जमाबंदी
5.बैंक अकाउंट पासबुक।
6.पासपोर्ट साइज फोटो
7.मोबाइल नंबर

इस योजना को 3 योजनाओं को मिलाकर बनाया गया है जिसमें त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम ( AIBP) एक्सीलरेटर इरीगेशन बेनिफिट प्रोजेक्ट जो कि जल शक्ति मंत्रालय देखता है,एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम,(IWMP) जिसे भूमि संसाधन विभाग और ग्रामीण विकास मंत्रालय देखता है। तीसरी योजना है ऑन फॉर्म जल प्रबंधन जो कृषि और सहकारिता विभाग के अंतर्गत आता है।

इस योजना के तीन मुख्य घटक है- AIBP, HKKP और वॉटरशेड डेवलपमेंट है। इनमें हर खेत को पानी पर सरकार सबसे ज्यादा फोकस कर रही है। इसका उद्देश्य लघु सिंचाई के माध्यम से नये जल स्त्रोत निर्मित करना, जल निकायों की मरम्मत करना, उनका नवीनीकरण, पारंपरिक जल स्त्रोतों की वहन क्षमता को मजबूत करना और बारिश का पानी जमा करने के लिए विभिन्न स्त्रोतों का निर्माण करना है।

योजना का उद्देश्य

  • क्षेत्रीय स्तर पर सिंचाई में निवेश को बढ़ावा देना
  • देश के हर खेत को पानी पहुंचाना
  • अधिक फसल प्रति बूंद का लक्ष्य
  • वाटरशेड डेवलपमेंट के तहत मिट्टी और जल संरक्षण, भूजल की भरपाई, मिट्टी बहने को रोकना और जल संरक्षण पर जोर देना है।

मध्य प्रदेश के में कैसे काम करती है?

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 75और 25% होती है। प्रदेश के कई किसान योजना का लाभ लेकर अपनी कृषि भूमि को सब्सिडी प्राप्त यंत्रों से सिंचित कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के मंडला, डिंडोरी, शहडोल उमरिया और सिंगरौली जिलों में इस योजना के तहत बोरवेल का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। मध्य प्रदेश के लिए योजना के तहत 1706 करोड रुपए आवंटित किए गए हैं, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार 682 करोड़ 40 लाख 40 हज़ार रुपए का भुगतान करेगी।एक्सीलरेटेड इरिगेशन बेनिफिट प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2020- 21 के लिए केंद्रीय केंद्रीय सहायता 19.69 करोड रुपए की दी गई ।

योजना के बारे में पढ़कर लगता है कि बेशक योजना देश के किसानों के लिए वरदान साबित होगी। योजना के मुख्य उद्देश्य, इसके लिए प्रस्तावित बड़ी राशि, केंद्र और राज्य का साथ मिल कर काम करना योजना को काफी आकर्षक बनाता है। लेकिन योजना की जमीनी हकीकत क्या है?

क्या सचमुच किसान समृद्ध हो रहे हैं? क्या हर खेत को पानी पर्याप्त पानी मिल रहा है? इतनी बड़ी राशि का किस तरह से उपयोग हो रहा है? यह जानना जरूरी है। आज हमने आपको योजना किस तरह से काम करती है,इस बारे में बताया। ग्रामीण स्तर पर इसकी सच्चाई जानने के लिए हम मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में योजना के अंतर्गत क्या काम हुआ है? कितनी राशि किसानों के उपयोग में आ रही है आपको बताएंगे।

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