After all, what's in Pushpa: The Rise?
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आखिर पुष्पा: द राइज़ में है क्या ?

फिल्म की कहानी की बात करें तो पुष्पा राज (अल्लू अर्जुन) एक शातिर लाल चंदन की लकड़ी का तस्कर है जो सिंडिकेट में रैंकों के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ता है. इस दौरान उसका पुलिस डिपार्टमेंट से भी पाला पड़ता है. ये फिल्म तिरुपति की पृष्ठभूमि पर बनी है. इस फिल्म में रश्मिका ने अल्लू अर्जुन की प्रेमिका का किरदार निभाया है.

पुष्पा की बात करें तो ये फिल्म एक्शन और डायलॉग से भरपूर है. अल्लू अर्जुन वन मैन आर्मी की तरह फिल्म से सभी का दिल जीतते नजर आए हैं. उनकी बॉडी लैंग्वेज, डायलॉग डिलिवरी, एक्शन शानदार है. फिल्म एक्शन से भरपूर है. एक्शन सीन्स रोहित शेट्टी की फिल्म की तरह धमाकेदार हैं. अल्लू और रश्मिका की लव स्टोरी काफी एंटरटेन करती है. खास कर इंटरवेल के बाद के कुछ सीन्स बहुत ही शानदार हैं.

‘पुष्पा- द राइज़’ एक अंडरडॉग की कहानी है. एक आदमी जिसे समाज ने नकार दिया. वो अपने दम पर एंपायर खड़ा करता है. सारा गेम उस फिल्ममेकिंग टेक्निकैलिटी का है, जिसे शास्त्रो में ट्रीटमेंट कहा गया है. इस फिल्म को जैसे ट्रीट किया गया है, वही चीज़ इसे खास बनाती है. सुकुमार, जिन्होंने पिछले दिनों ‘रंगस्थलम’ जैसी फिल्म बनाई थी, ‘पुष्पा’ के डायरेक्टर भी वही हैं. सुकुमार को जनता की नब्ज़ पता है. वो चंदन की लकड़ी की स्मगलिंग से जुड़ी फिल्म को भी ऐसे एंटरटेनिंग अंदाज़ में पेश करते हैं कि देखकर मज़ा आ जाए. वही घिसी-पिटी कहानी. वही हीरोगिरी. वही फैन सर्विस. मगर इस सबका एंड रिज़ल्ट निकलता है एक क्वॉलिटी मसाला फिल्म.

‘पुष्पा’ एक प्रॉपर मेनस्ट्रीम फिल्म है, मगर उसमें एक स्वैग है. हर डायलॉग में स्टारडम का बोझ है. जिसकी वजह से उसकी कही हर लाइन पब्लिक तक पहुंचते-पहुंचते पंचलाइन बन जाती है. फिल्म में वेल कोरियोग्राफ्ड एक्शन सीक्वेंसेज़ हैं, जो देखने में बढ़िया लगते हैं. बैकग्राउंड स्कोर में गुंज़ाइश बचती है. मगर म्यूज़िक डायरेक्टर देवी श्री प्रसाद  अपने गानों से ये हिसाब चुका देते हैं. मगर सबसे इंट्रेस्टिंग हिस्सा है फिल्म की सिनेमैटोग्रफी. फिल्ममेकर और सिनेमैटोग्राफर एक ही फिल्म को दो अलग-अलग तरीके से विज़ुअलाइज़ करते हैं. मगर जब ये दोनों लोग एक जैसा सोचने लगें, तो फिल्म की रूपरेखा बदल जाती है. यही चीज़ ‘पुष्पा’ में देखने को मिलती है.

फिल्म की सबसे ज़्यादा खटकने वाली चीज़ जो काफी दर्शकों द्वारा भी साझा की गई जो है रश्मिका मंदाना और अल्लू अर्जुन की लव स्टोरी. ये फिल्म का सबसे गैर-ज़रूरी और प्रॉब्लमैटिक हिस्सा है. इस दिक्कत भरी चीज़ को भी फिल्म आखिर में जस्टिफाई कर देती है. जिसका बिल्कुल कोई सेंस नहीं बनता. फहाद फाज़िल ने भंवर सिंह शेखावत नाम के पुलिस ऑफिसर का रोल किया है. वो फिल्म के बिल्कुल आखिरी के हिस्से में आता है. जब दो बड़े स्टार्स स्क्रीन पर एक-दूसरे के सामने आते हैं, तो अलग ही लेवल का सीन होता है. इसी चीज़ को भुनाने के लिए अल्लू अर्जुन और फहाद फाज़िल के बीच फिल्म के आखिर में कुछ कंफ्रंटेशनल सीन्स डाले गए हैं. मगर ये सीन्स वो प्रभाव पैदा नहीं कर पाते, जिस मक़सद से इन्हें फिल्म में जगह दी गई थी.

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